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4.5 डिग्री सेल्सियस पहुंचा पारा, भीषण ठंड ने कंपाया

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सुल्तानपुर। भीषण ठंड से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। शुक्रवार को भीषण ठंड से लोग कांप उठे। पछुआ से बढ़ी गलन ने आम जनजीवन को बेहाल कर दिया। जिले का पारा लुढ़ककर 4.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में भी ठंड से राहत नहीं मिलने और तापमान में गिरावट का अनुमान लगाया है।
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शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन गलन भरी ठंड जारी रही। पछुआ ने ठंड में और इजाफा कर दिया। दो दिनों से बढ़ी ठंड ने लोगों को घरों में दुबकने के लिए मजबूर कर दिया है। रात और सुबह-शाम हो रही कड़ाके की ठंड ने आम जनजीवन को बेहाल कर दिया है।
ठंड से बचाव के लिए लोगों को गर्म कपड़ों व अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है। ठंड से निजात के लिए लोग हीटर व ब्लोअर का भी सहारा ले रहे हैं। लगातार दूसरे दिन भी गलन भरी ठंड से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। पारा लुढ़ककर 4.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
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तापमान में आ रही गिरावट ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। लोग कड़ाके की ठंड के कारण रात और सुबह-शाम कम संख्या में घरों से निकल रहे है। दिन में धूप निकल आने पर लोगों को ठंड से मामूली राहत मिल गई। शाम होते ही एक बार फिर गलन भरी ठंड शुरू हो गई।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में भी ठंड से राहत नहीं मिलने और तापमान में गिरावट आने का अनुमान लगाया है। आचार्य नरेंद्रदेव कृषि एंव प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम पर्यवेक्षक अमरनाथ मिश्र ने बताया कि शुक्रवार को अधिकतम तापमान 18.5 डिग्री सेल्सियस रहा। न्यूनतम तापमान 6.0 डिग्री सेल्सियस से गिरकर 4.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
जिले में दो दिनों से हो रही कड़ाके की ठंड के बाद भी शहर समेत ग्रामीण इलाकों में पर्याप्त संख्या में अलाव नहीं जलवाए गए हैं। शहर में कुछ जगहों पर अलाव जल रहे हैं, जबकि कई जगहों पर अभी भी अलाव की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अलाव की व्यवस्था दूर-दूर तक देखने को नहीं मिल रही है। प्रमुख चौराहों व बाजारों में अलाव नहीं जलवाने से लोग ठंड में परेशान हैं।
कमला नेहरू कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीके त्रिपाठी ने बताया कि मौसम में आए बदलाव को देखते हुए किसान सतर्क हो जाएं। किसानों को चाहिए कि वे पाला, झुलसा रोग से बचाव के लिए तत्काल आलू की फसल की सिंचाई करें। साथ ही झुलसा रोग से बचाव के लिए दवा का छिड़काव कराएं। उन्होंने बताया कि राई, सरसों, गेहूं, मटर, चना समेत अन्य फसलों में नमी बनाए रखने के लिए सिंचाई कराना जरूरी है।
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