सुल्तानपुर। अपने शहर में मेडिकल कॉलेज की जिन उम्मीदों को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने झटका दे दिया था, अब वे उम्मीदें परवान चढ़ गई हैं। एनएमसी ने आपत्तियां दूर होने के बाद मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए मान्यता दे दी है। इससे मेडिकल कॉलेज ही नहीं शहर में भी खुशी है।
स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने एमबीबीएस के पाठ्यक्रम शुरू करने की मान्यता प्रदान कर दी है। शैक्षिक सत्र 2024-25 में यहां 100 सीटों पर दाखिला लिया जा सकेगा। नीट उत्तीर्ण कर काउंसिलिंग के जरिये आने वाले छात्र यहां एमबीबीएस (मेडिकल ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी) की पढ़ाई करेंगे। मान्यता मिलने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
शहर से सटे दूबेपुर व जिला अस्पताल को मिलाकर 276 करोड़ रुपये की राशि से स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय का निर्माण किया गया है। दूबेपुर में शिक्षण ब्लॉक, प्रशासनिक भवन, लैब, प्राचार्य आवास, प्रोफेसर आवास, कर्मचारी आवास व जूनियर रेजीडेंट हास्टल समेत अन्य भवन बने हैं।
इसके अलावा बॉयज व गर्ल्स हास्टल, प्राचार्य कक्ष, बहुउद्देशीय हाल, ऑटोप्सी समेत जरूरी निर्माण व संसाधन पूरे किए जा चुके हैं। जिला अस्पताल परिसर में मौजूद भवनों को तोड़कर प्रैक्टिकल के साथ ही मरीजों के इलाज की व्यवस्था व अन्य प्रयोगशालाओं का निर्माण किया गया है। हालांकि अभी कुछ मेडिकल विंग का निर्माण चल रहा है।
पर्याप्त पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद
मेडिकल कॉलेज में अभी नौ प्रोफेसर, 18 एसोसिएट प्रोफेसर व 37 असिस्टेंट प्रोफेसर ही नियुक्त हैं। इसके अलावा सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर 24 व जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर 60 हैं। पर्याप्त पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद है। अभी डाक्टरों और स्टाफ की भर्ती चल रही है जिसे अगस्त तक पूरा कर लेने का दावा किया जा रहा है।
एनएमसी ने मान्यता देने से किया था इन्कार
एनएमसी टीम ने 24 जून को निरीक्षण कर मेडिकल कॉलेज प्रशासन को फैकल्टी की कमी समेत अन्य कमियां गिनाईं और उसे पूरा कर फिर से मान्यता संबंधी आवेदन करने को कहा था। अपील के लिए 15 दिन का समय दिया था। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज प्रशासन कमियां दूर करने में विफल रहा। स्थिति यह रही कि एनएमसी ने मान्यता देने से इन्कार कर दिया। हालांकि प्रदेश सरकार की दखल के बाद मान्यता के मानक पूरे किए जा सके।
वर्ष 2021 में शुरू हुआ था मेडिकल कॉलेज का निर्माण
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने वर्ष 2018-19 में ही मेडिकल कॉलेज बनाने का प्रस्ताव दिया था। शुरुआती अड़चन शहर से 10 किमी के दायरे में 30 एकड़ जमीन की व्यवस्था थी। काफी मशक्कत के बाद प्रशासन दूबेपुर में जमीन खोजने में सफल रहा। दूबेपुर में मिली जमीन और जिला अस्पताल परिसर को मिलाकर मानक पूरा हो सका। इसके बाद वर्ष 2020 में प्रदेश सरकार की ओर से मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए शासनादेश जारी किया गया। परियोजना को पूरा करने के लिए गुजरात की कांस्ट्रक्शन कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी गई। वर्ष 2021 में परियोजना का शिलान्यास हुआ। 273 करोड़ में यह प्रोजेक्ट पूरा हो सका।
मान्यता मिलना बड़ी उपलब्धि : प्राचार्य
प्राचार्य डाॅ. सलिल श्रीवास्तव ने बताया कि मेडिकल कॉलेज को एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए मान्यता मिलना बहुत बड़ी उपलब्धि है। इसके लिए सरकार ने भी काफी मेहनत की। जो काम अधूरे हैं, अब अगस्त तक पूरे कर लिए जाएंगे। पहले बैच की पढ़ाई सितंबर से शुरू कर दी जाएगी।