नवरात्र में कुछ दिन ही शेष बचे हैं। क्षेत्र में नवरात्र से शुरू होने वाले दुर्गापूजा महोत्सव की तैयारियों जोरों पर हैं। पश्चिम बंगाल और झारखंड से आए कारीगर देवी के पंडालों को मूर्तरूप देने में जुटे हैं। समितियों की ओर से दुर्गापूजा पंडालों को एक-दूसरे से बेहतर बनाने की होड़ मची है।
वर्ष 1987 में शहर के रामसुंदर मोदनवाल, शिवकुमार जायसवाल, सुरेशचंद्र कसौधन सहित 21 लोगों ने एक कमेटी बनाकर शहर के गांधी चौक पर दुर्गापूजा पंडाल सजाने की शुरुआत की थी। इसी के बाद शुरू हुआ सिलसिला अब शहर से लेकर गांवों तक फैल चुका है। हर वर्ष सैकड़ों की संख्या में दुर्गापूजा पंडाल सजाए जाते हैं। दुर्गापूजा महोत्सव को कुछ दिन ही शेष हैं। दुर्गापूजा की तैयारियों को लेकर पंडालों को एक-दूसरे से बेहतर बनाने की होड़ मची है।
पश्चिम बंगाल और झारखंड से आए कारीगर पंडालों को मूर्तरूप देने में लगे हैं। इन पंडालों में विभिन्न शक्तिपीठों पर विराजमान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन होंगे। दुर्गापूजा संचालन समिति के अध्यक्ष सुरेश बताते हैं कि नब्बे के दशक में दुर्गा पूजा संचालन समिति का गठन किया गया था।
समिति की ओर से क्षेत्र की दुर्गापूजा समितियों को पुरस्कार व मेडल प्रदान किए जाते है। बताया कि शहर में दुर्गापूजा महोत्सव में 25 से अधिक व ग्रामीण क्षेत्रों में सैकड़ों की संख्या में पंडाल सजाए जाते हैं।