बांदा-टांडा राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुल बनाने के लिए एनएचएआई ने बगैर वैकल्पिक उपाय के लोदी नाला बांध दिया जिससे किसानों की सैकड़ा बीघा फसल जलमग्न हो गई। बीते एक सप्ताह से जलमग्न फसल नष्ट होने के कगार पर है। किसानों की शिकायत पर डीएम ने एनएचएआई के अफसरों से जवाब मांगा है।
शहर के पश्चिमी छोर पर बहने वाला लोदी नाला जलनिकासी के प्रमुख साधनों में एक है। बांदा-टांडा राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुराने जर्जर पुल के स्थान पर नया पुल बनाने के लिए एनएचएआई ने इस नाले पर बन्धा डाल दिया है। नाले पर बन्धा पड़ने से बरसात का पानी नहीं निकल पा रहा है। नतीजतन शहर से सटे माधवपुर गांव के करीब 25-30 किसानों की सौ बीघा धान की फसल बीते एक हफ्ते से जलमग्न हो गई है।
लंबे समय से फसल डूबने से यह नष्ट होने के कगार पर है। एनएचएआई की ओर डाले गए बन्धे की वजह से उपजे इस हालात से नाराज किसान सोमवार को डीएम चंद्रकांत पांडेय से मिले। किसानों ने जलनिकासी के लिए नाले पर डाला गया बन्धा खुलवाने या कोई वैकल्पिक व्यवस्था कराने को कहा। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने एनएचएआई अफसरों से जवाब-तलब करते हुए पूरे मामले पर रिपोर्ट मांगी है।
साथ ही बन्धा हटाने को कहा है। डीएम ने कहा कि यदि मामले में एनएचएआई के अफसर दोषी पाए जाएंगे तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।