मौसम के बदले मिजाज से बुधवार को दोपहर बाद शहर समेत जिले के अन्य ग्रामीण इलाकों में बूूंदाबांदी शुरू हो गई। बूंदाबांदी होने से मौसम सर्द हो गया है। बूंदाबांदी होने से रबी में बोई जाने वाली सभी फसलों को फायदा होगा। लंबे समय से बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे किसानों के चेहरे बूंदाबांदी होने से खिल गए हैं। हालांकि, बारिश होने पर अगेती धान की फसल के प्रभावित होने के आसार है।
खरीफ की फसल में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे किसानों को रबी की फसल में कुछ राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। जिले में किसानों ने 88,066 हेक्टेयर में धान की रोपाई कराई थी। इसमें से 1,367 हेक्टेयर में अगेती धान की रोपाई हुई थी। जून, जुलाई व अगस्त माह में महज 320.5 मिमी बारिश हुई थी जबकि सितंबर माह में बारिश हुई ही नही थी। औसत से काफी कम बारिश होने से धान का अनुमानित उत्पादन लक्ष्य हासिल करना काफी मुश्किल है। बारिश नहीं होने से किसान खरीफ की मुख्य फसल धान में भारी नुकसान उठा चुके हैं। इसके अलावा तिल, मक्का, अरहर, ज्वार, बाजरा, उर्द समेत अन्य फसलों में भी किसानों को व्यापक नुकसान हुआ है। हालत यह है कि किसानों को फसलों से लागत निकाल पाना भी मुश्किल हो गया है।
किसान कई बार में सिंचाई करके धान की फसल को किसी तरह से तैयार कर सके हैं। बुधवार को दोपहर मौसम के बदले मिजाज से बूंदाबांदी शुरू होने से बारिश हाने की उम्मीद बढ़ गई है। ऐसे में खेत में काटकर रखी गई अगेती धान की फसल में बारिश होने पर नुकसान होगा। अगेती के अलावा धान की अन्य फसलों में नुकसान होने की उम्मीद नहीं है। बारिश होने पर रबी की सभी फसलों में फायदा होगा। किसान को इस बात को लेकर खुश है कि वे खेतों में नमी हो जाने पर रबी की फसलों की बोआई करा लेंगे।