सुल्तानपुर। कादीपुर एलआईसी डकैती कांड में 18 साल बाद आए फैसले ने पुलिस विवेचना की कमजोरियों को उजागर कर दिया। जिस मामले को पुलिस ने सनसनीखेज डकैती बताकर चार्जशीट दाखिल की थी, अदालत में वही मुख्य आरोप टिक नहीं सका। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम संध्या चौधरी की अदालत ने आठ आरोपियों को डकैती के आरोप से बरी करते हुए केवल आपराधिक षड्यंत्र और बरामदगी के अपराध में दोषी माना और एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया है।
मामला कादीपुर स्थित भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की शाखा से जुड़ा है। एक सितंबर 2008 को तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने 13.50 लाख रुपये की डकैती का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच के बाद 10 लोगों के खिलाफ डकैती समेत गंभीर धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान दो आरोपियों की मृत्यु हो गई, जबकि शेष आठ पर मुकदमा चलता रहा। लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने पाया कि डकैती का आरोप प्रमाणित नहीं है। इस फैसले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि इतने गंभीर मामले में जांच और साक्ष्य संकलन कितना पुख्ता था। अभियोजन पक्ष का कहना है कि आदेश का अध्ययन कर आगे उच्च न्यायालय में अपील करने पर विचार किया जाएगा।