मारपीट के मामले की विवेचना में लापरवाही करने व गलत रिपोर्ट देने पर एसीजेएम द्वितीय अनिल कुमार सेठ ने बुधवार को कड़ा रुख अख्तियार करते हुए विवेचक दरोगा को कस्टडी में लेने का आदेश दिया। अदालत के आदेश पर करीब घंटे भर तक दरोगा को लॉकअप में खड़ा रहना पड़ा। कोर्ट से दी गई नोटिस का जवाब देने के बाद दरोगा को छोड़ा गया। मामला मोतिगरपुर थाने के दियरा गांव से जुड़ा है।
दियरा गांव निवासी फिरतूराम ने 19 मार्च 2014 को गांव के ही रामदास, ज्ञानदास, ओमप्रकाश के खिलाफ एनसीआर के तहत मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया था। फिरतूराम का आरोप है कि जमीन के विवाद को लेकर आरोपियों ने उसे लाठी-डंडे से मारपीट कर चोटें पहुंचाई थी। फिरतूराम की अर्जी पर कोर्ट ने पुलिस को मामले की विवेचना करने का आदेश दिया था। कई माह बीतने के बावजूद पुलिस के गवाहों का बयान नहीं दर्ज करने पर फिरतूराम ने दोबारा अदालत की शरण ली थी।
फिरतूराम ने बीते 13 जनवरी को कोर्ट में अर्जी देकर मामले की मॉनिटरिंग कराए जाने की मांग की थी। कोर्ट ने मामले में पुलिस से रिपोर्ट तलब की थी। पुलिस ने कोर्ट में रिपोर्ट भेजकर बताया था कि मामले की विवेचना की जा रही है। कई पेशी बाद पुलिस ने इसी मामले में दोबारा रिपोर्ट भेजी कि प्रकरण की विवेचना नहीं की जा रही है। विरोधाभासी रिपोर्ट भेजने पर कोर्ट ने विवेचक को तलब किया था।
इसी मामले में बुधवार को अदालत में पेश हुए मोतिगरपुर थाने के दरोगा रामकृपाल चौहान ने कोर्ट में आई रिपोर्ट के बारे में कहा कि उन्होंने रिपोर्ट नहीं भेजी थी। इस पर एसीजेएम द्वितीय अनिल कुमार सेठ ने दरोगा को कस्टडी में लेने का आदेश दिया। कोर्ट ने मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।