सुल्तानपुर। डेढ़ साल से फरार 50 हजार के इनामी इंस्पेक्टर नीशू तोमर को बचाने की पुलिस अफसरों की सारी कोशिशें धरी रह गईं। दुष्कर्म के आरोप से जुड़ी सभी धाराएं हटाकर कोर्ट में पेश की गई पुलिस की चार्जशीट को कोर्ट ने सही नहीं माना। कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि विवेचक में विधिक ज्ञान का अभाव है और आरोपी को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई है। साथ ही फरार इंस्पेक्टर को केस में दर्ज दुष्कर्म समेत सभी धाराओं के तहत तलब करने का आदेश भी दिया है।
जिले में तैनात एक महिला आरक्षी ने इंस्पेक्टर नीशू तोमर पर 14 जुलाई 2022 को कोतवाली नगर में केस दर्ज कराया था। जिसमें आरोप लगाया कि हलियापुर थाने में दोनों की तैनाती के दौरान इंस्पेक्टर ने उसके साथ दुष्कर्म किया, अश्लील फोटो-वीडियो बनाए और उसे वायरल कर दिया। इस मामले में 22 सितंबर 2022 को इंस्पेक्टर को हिरासत में लिया गया था। पुलिस उसे महिला थाने लाई, जहां से उसके फरार हो जाने का वीडियो भी वायरल हुआ था। हालांकि पुलिस अफसर आज तक उसके फरार होने की बात को गलत बताते हैं और हिरासत के बाद छोड़े जाने की बात कहते हैं। तब से इंस्पेक्टर फरार चल रहा है।
इस मामले की पहले विवेचना तत्कालीन सीओ सिटी राघवेंद्र चतुर्वेदी ने की और नए विवेचक सीओ शिवम मिश्र ने 19 फरवरी को आरोप पत्र सीजेएम कोर्ट में दाखिल कर दिया। जिसमें सुप्रीम कोर्ट के कुछ आदेशों का हवाला देते हुए पीड़िता और आरोपी के बीच सहमति से शारीरिक संबंध बनने, दोनों के बालिग होने और दोनों को कानून का जानकार बताते हुए दुष्कर्म के आरोप से क्लीनचिट दे दी।
पीड़िता के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने चार्जशीट को पक्षपातपूर्ण और आरोपी को लाभ पहुंचाने के लिए गलत विवेचना बताया। साथ ही पीड़िता के साक्ष्य नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में आपत्ति दाखिल की थी। सीजेएम बटेश्वर कुमार ने मंगलवार को इंस्पेक्टर नीशू तोमर को दुष्कर्म समेत कई गंभीर आरोपों में तलब करने का आदेश दे दिया है। कोर्ट के आदेश से आरोपी इंस्पेक्टर की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
कोर्ट की मॉनिटरिंग के बावजूद विवेचक ने दिखाई दरियादिली
सुल्तानपुर। आरोपी इंस्पेक्टर को दुष्कर्म के आरोप से मुक्ति देने पर कोर्ट ने हैरानी जताई कि अदालतों की मॉनिटरिंगके बावजूद विवेचक ने ऐसा कर दिया। पीड़िता आरक्षी ने 26 जुलाई 2022 को पुलिस विवेचना पर संदेह करते हुए मॉनिटरिंग के लिए सीजेएम कोर्ट में अर्जी दी थी। आरोप लगाया था कि पुलिस जानबूझकर आरोपी के प्रभाव में विवेचना लटकाए है और गिरफ्तारी भी नहीं कर रही। कई पेशियों पर विवेचक तलब भी किए गए थे। विवेचना जल्द पूरी कराने के लिए पीड़िता हाईकोर्ट गई। जहां उसकी याचिका पर हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2022 को एसपी को आठ सप्ताह में सीओ रैंक के अधिकारी से विवेचना पूरी कराने का आदेश दिया था। तब विवेचना सीओ ने शुरू की। पीड़िता के अधिवक्ता संतोष पांडेय बताते हैं कि निर्धारित समयावधि में विवेचना पूरी न होने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई है। हाईकोर्ट ने एसपी से भी जवाब मांगा था।