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जिला महिला अस्पताल में हर पल संक्रमण का खतरा

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सुल्तानपुर। जिला महिला अस्पताल प्रशासन मरीजों के साथ ही जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं का जीवन खतरे में डाल रहा है। यहां प्रसूता और बेबी केयर यूनिट के पास आवारा कुत्तों की भरमार है।
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हर पल नवजात शिशुओं के साथ ही प्रसूताओं में संक्रमण फैलने की संभावना बनी है। रविवार को जिला महिला अस्पताल का अमर उजाला के रियलटी चेक में सब कुछ अस्त व्यस्त मिला।
जिला महिला अस्पताल में प्रसूताओं के बेहतर इलाज के लिए शासन ने तमाम व्यवस्थाएं दी हैं लेकिन चिकित्सकों ने इसे धरातल पर उतरने ही नहीं दिया।
कभी चिकित्सकों की कमी का रोना रोया गया तो कभी स्टाफ के साथ ही संसाधन का। शासन के आदेश पर जिला महिला अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 100 शैय्या का अस्पताल बनकर तैयार हो गया, लेकिन आज तक इसका संचालन शुरू नहीं हो सका।
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रविवार को जिला महिला अस्पताल का जायजा लिया गया तो सब कुछ अस्त व्यस्त मिला। जिला महिला अस्पताल के जनरल वार्ड में भर्ती प्रसूताओं के कक्ष और बेबी केयर यूनिट के ठीक बाहर कई आवारा कुत्ते आराम फरमाते मिले।
यदि कोई तीमारदार कुत्तों को हटाने की कोशिश करता तो कुत्ते उस पर गुर्राते भी हैं। एक तीमारदार ने बताया कि दो कुत्ते थोड़ी देर पहले बेबी केयर यूनिट में घुस गए थे।
हालांकि बेबी केयर यूनिट में मौजूद स्टाफ नर्स ने कुत्ते को डांटकर भगा दिया। एक तीमारदार ने बताया कि आज वह अपनी पत्नी को लेकर डॉ. मानसी तोमर को दिखाने पहुंचा था, लेकिन डॉ. मानसी तोमर एक प्राइवेट नर्सिंग होम में प्रैक्टिस करने गई हैं।
इसलिए वह वापस जा रहा है। एक महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. उर्मिला चौधरी पर झल्लाते हुए बोली कि यदि सीएमएस चाहें तो व्यवस्था ठीक हो सकती है, लेकिन वे खुद व्यवस्था को ठीक करना नहीं चाहती हैं। न तो चिकित्सक समय पर मिलते हैं और न ही चिकित्सीय सेवा। ऐसे में मरीजों का हाल बेहाल है।
जिला महिला अस्पताल में टहल रहे आवारा कुत्तों से नवजात को खतरा बना है। करीब चार वर्ष पहले आवारा कुत्तों ने एक शिशु को नोंच डाला था। घटना को लेकर उस समय हायतौबा मची लेकिन धीरे-धीरे फिर अव्यवस्था हाबी हो गई।
जिला महिला अस्पताल में आधुनिक सुविधा वाला 100 बेड का अस्पताल बनकर तैयार हो गया है। करीब एक वर्ष पहले तत्कालीन सांसद वरुण गांधी ने इसका उद्घाटन भी किया था।
इसके बाद अस्पताल में ओपीडी तो शुरू हो गई लेकिन वार्डों का संचालन अभी तक नहीं शुरू हो सका। वार्ड का संचालन नहीं होने से प्रसूताओं एवं प्रसव पीड़िताओं के भर्ती होने में रोजाना दिक्कत हो रही है। बेड के अभाव में काफी मरीज निजी अस्पतालों में चले जा रहे हैं।
सीएमओ डॉ. चंद्रभूषण नाथ त्रिपाठी ने बताया कि प्रसूताओं और बेबी केयर यूनिट के पास किसी तरह की गंदगी नहीं होनी चाहिए। आवारा कुत्ते कक्ष के आसपास होंगे तो जन धन के नुकसान होने के साथ ही संक्रमण रोग फैल सकता है। इस बारे में सीएमएस से वार्ता कर उन्हें व्यवस्था ठीक करने के लिए कहा जाएगा।
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