सुल्तानपुर। धार्मिक आस्था के साथ सुल्तानपुर अब पर्यटन के नक्शे पर भी अपनी पहचान बना रहा है। धोपाप, सीताकुंड और विजेथुआ महावीरन धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ से इन क्षेत्रों की रौनक बढ़ी है। सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय कारोबार को भी सहारा मिला है। पर्यटन विभाग अब जिले के अन्य धार्मिक स्थलों को भी पर्यटन सुविधाओं से जोड़ने की तैयारी में है।
लंभुआ का धोपाप धाम गोमती तट पर स्थित प्रमुख धार्मिक स्थल है। मान्यता है कि रावण वध के बाद भगवान राम ने यहां स्नान कर ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाई थी। धाम में पक्के घाट, लाइटिंग समेत अन्य सुविधाएं विकसित करने की योजना है। शहर स्थित सीताकुंड धाम भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि वनवास के दौरान माता सीता ने यहां अपने केश धोए थे।
विजेथुआ महावीरन धाम में सबसे अधिक चहल-पहल रहती है। ऐसी मान्यता है कि यहीं हनुमान जी ने कालनेमि का वध किया था। पिछले दो वर्षों में यहां शौचालय, पार्किंग, घाटों का सुंदरीकरण और रास्तों के सुधार समेत कई कार्य हुए हैं। आलोक मोदनवाल और भूपेंद्र पांडेय के अनुसार, हर मंगलवार आसपास के जिलों से एक लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। राजकुमार अग्रहरि ने बताया कि भीड़ बढ़ने से प्रसाद, फूल-माला, खानपान और परिवहन से जुड़े कारोबार को बढ़ावा मिला है।
इन स्थलों के कायाकल्प की तैयारी
कुड़वार के निरमहिया हनुमान मंदिर, लंभुआ के लोटिया स्थित संकट मोचन हनुमान धाम शांति आश्रम, कादीपुर के अघोर पीठ बाबा सत्यनाथ मठ, अल्देमऊ नूरपुर, अखंडनगर की बाबा बालकदास कुटी, हयातनगर के शंकर मंदिर, बल्दीराय के शिवराजपुर स्थित श्री माई धाम और सुखबड़ेरी के सुखदेव मुनि आश्रम को भी पर्यटन सुविधाओं से जोड़ने की योजना है।
प्रभारी पर्यटन अधिकारी डॉ. धीरेंद्र यादव ने बताया कि कई धार्मिक स्थलों के विकास की योजना तैयार है। जयसिंहपुर में बीआरसी के सामने शिव मंदिर, कादीपुर के जहीरुद्दीनपुर स्थित भैंसासुर धाम और अन्नपूर्णानगर के प्राचीन शिव मंदिर के विकास को स्वीकृति मिल चुकी है।
आस्था बनी रोजगार की राह
धार्मिक स्थलों पर बढ़ती भीड़ से प्रसाद, फूल-माला, खानपान, परिवहन और छोटी दुकानों से जुड़े कारोबारियों की आमदनी बढ़ रही है। सुविधाओं के विस्तार के साथ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।