जिले की थोक और फुटकर मंडियों में सब्जी के भाव में अंतर तीन से छह गुना तक पहुंच गया है। बिचौलियों की सक्रियता से सस्ती सब्जी का लाभ आम लोगों को नहीं मिल पा रहा है। थोक आढ़तिए किसानों को रियायती दर पर सब्जी बेचने को मजबूर कर रहे हैं। किसानों के लिए सब्जी की खेती घाटे का सबब बनती जा रही है।
जिला मुख्यालय स्थित अमहट, कादीपुर, कोइरीपुर, लंभुआ समेत अन्य बड़ी मंडियों में बिचौलियों की सक्रियता बढ़ गई है। इससे थोक व फुटकर सब्जी के भाव में अंतर तीन से छह गुने तक पहुंच गया है। किसानों की सब्जियां कम दर पर खरीदे जाने से उनके आगे लागत निकालने की समस्या खड़ी हो गई है। किसानों को खाद, बीज, सिंचाई, निराई-गुड़ाई व मंडियों तक लाकर बेचने का वाजिब लाभ नहीं मिल पा रहा है।
फल एवं सब्जी व्यापार मंडल अध्यक्ष मो. शमीम ने बताया कि थोक व फुटकर मूल्य में भारी अंतर होने से सस्ती सब्जी का लाभ बिचौलिए उठाने लगे हैं। ऐसे में मध्यम व निम्न वर्ग हरी सब्जियों से वंचित होने लगा है। मंडी सचिव से वार्ता कर सब्जी के थोक व फुटकर मूल्य के अंतर को कम कराया जाएगा।
थोक व फुटकर सब्जी का भाव नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने मंडियों में सचिव स्तर के अफसरों की तैनाती कर रखी है। इन्हें प्रतिदिन के भाव की समीक्षा करने के निर्देश हैं। बावजूद मंडी प्रशासन अपने कर्तव्य के प्रति उदासीन बना हुआ है।
मंडी सभापति रतीभान वर्मा ने बताया कि मूल्य नियंत्रित करने के लिए टीम गठित कर थोक व फुटकर मूल्य की समीक्षा की जाएगी। बिचौलियों की सक्रियता थोक मंडियों से खत्म की जाएगी।