दोना-पत्तल मशीन के पास खड़ी गुजराती।
सुल्तानपुर। सोनम महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनने के बाद गुजराती के परिवार का जीवन आसान बन गया है। पहले हाथ से दोना-पत्तल बनाने का काम शुरू किया। बिक्री बढ़ने पर वर्ष 2020 में एक मशीन लगा ली। क्षेत्र में ज्यादा मांग बढ़ने पर इसी वर्ष जनवरी में दो और मशीन लगा लिया। तीन मशीन से गुजराती दोना-पत्तल बना रही हैं।
बाजारों में मांग बढ़ने पर गुजराती ने अपने दो बेटाें को स्वरोजगार में लगा लिया है। बताया कि एक बेटा उनके साथ मशीन से दोना पत्तल बनाने का काम करता है। कुछ और लोगों को इस काम के लिए रखा है। उन्हें मेहनताना दिया जा रहा है। एक बेटा अंबेडकरनगर की कुछ बाजारों सहित जिले की सेमरी, गौसैसिंहपुर, दोस्तपुर कस्बे में दोना-पत्तल की आपूर्ति दुकानों पर कर रहा है। दोस्तपुर के अलहदादपुर निवासी गुजराती देवी वर्ष 2015 में गांव के स्वयं सहायता समूह से जड़ी थीं।
बताया कि तब उनके पति मुंबई में प्राइवेट नौकरी करते थे। पति की कमाई से पांच बच्चों का पालन-पोषण मुश्किल हो गया था। वर्ष 2020 में उन्होंने स्वयं सहायता समूह के सहयोग दोना पत्तल बनाने का काम शुरू किया। अब तीन मशीन लगाकर कारोबार किया जा रहा है। जिला मिशन प्रबंधक नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि गुजराती महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी हैं।