करौंदीकला (सुल्तानपुर)। करौंदीकला से रवनिया की 12 किलोमीटर लंबी सड़क की उपेक्षा ने आम जन के सब्र का पैमाना छलका दिया है। इसलिए बिना किसी नेता के इस सड़क के लिए एक बड़ा आंदोलन खड़ा हो गया है। इस स्वत: स्फूर्त आंदोलन की तैयारी पहले सोशल मीडिया पर चली और अब ग्रामीण खुद घर-घर पर्चा बांट रहे हैं। सड़क नहीं तो वोट नहीं के नारे के साथ बुधवार को करौंदी कला थाने तक एक जनाक्रोश यात्रा निकालने की तैयारी हो रही है।
हालांकि लोक निर्माण विभाग ने इसका प्रस्ताव भी भेज रखा है, किंतु रोज हो रहे हादसों के कारण अब लोग सब्र नहीं कर पा रहे हैं। मंगलवार को भी सुबह सड़क पर गड्ढे के कारण बांगर कला की तरफ से आ रही गन्ने से लदी ट्रैक्टर ट्राॅली खुशियारी गांव के पास पलट गई। गनीमत रही कि चालक को चोट नहीं आई।
इस सड़क पर आशीष तिवारी, विनोद कुमार, संतोष तिवारी, अनिल , राम जगत यादव, सुरेश कुमार हरिजन, देवांश, रोहित सिंह सहित कई लोग वाहन पलटने से घायल हो चुके हैं, इसलिए 30 नवंबर को जनाक्रोश यात्रा निकालने के लिए बाकायदा एसडीएम को सूचना देकर अनुमति भी मांगी गई है। इस यात्रा को ऑटो रिक्शा चालकों ने भी समर्थन दिया है और वे खुद लाउड स्पीकर लेकर इसका प्रचार कर रहे हैं।
गुस्से में हैं लोग, चाहते हैं तत्काल काम
इस आंदोलन से जुड़े विकास मिश्र आंदोलन के बारे में सवाल करने पर कविता सुनाते हैं। कहते हैं कि सत्ता से संघर्ष हमारा होना है, अब नेताओं से ना कोई रोना है। जनांदोलन की शक्ति बढ़ाकर, नेताओं में खौफ बीज बोना है। एक ही नारा एक नाम, रोड नहीं तो वोट नहीं। प्रदीप तिवारी कहते हैं कि इस आंदोलन में सत्तापक्ष विपक्ष सबका स्वागत है, जो हमारे साथ है। हम उसके साथ हैं। प्रशांत सिंह कहते हैं कि यह काम स्थानीय विधायक का है। उन्हें अब तक यह काम करा देना चाहिए था।