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हिंदुस्तान पेपर मिल प्रोजेक्ट पर मोदी सरकार का ब्रेक

Thu, 10 Dec 2015 10:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अमेठी
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अमेठी। मेगा फूड पार्क के बाद करीब दशक भर से अमेठी में रोजगार की किरण बनीं हिंदुस्तान पेपर मिल पर भी आखिरकार मोदी सरकार का ब्रेक लग गया। यह मिल अब महाराष्ट्र के रत्नागिरि में लगाई जाएगी। अमेठी के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है। 3650 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट से क्षेत्र के करीब 10 हजार लोगों को प्रत्यक्ष व परोक्ष रोजगार मिलता। मिल स्थापना के लिए यूपीएसआईडीसी ने औद्योगिक क्षेत्र उतेलवा में 188 एकड़ जमीन आवंटित कर रखी है।
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2004 में राहुल गांधी के अमेठी से लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद से ही क्षेत्र के लोग हिंदुस्तान पेपर मिल की स्थापना की बात लगातार सुनते चले आ रहे थे। फरवरी 2012 में हिंदुस्तान पेपर मिल को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद क्षेत्र के लोगों की उम्मीदें परवान चढ़ने लगीं। इस बीच पेपर मिल के लिए जमीन नहीं मुहैया कराने के आरोप भी प्रदेश सरकार पर लगे थे।

क्षेत्र के लोग यही समझते रहे कि जमीन नहीं मिलने के कारण मिल स्थापना में देरी हो रही है। सात अक्तूबर 2013 को इंडो-गल्फ फर्टिलाइजर्स परिसर में मेगा फूड पार्क के शिलान्यास मौके पर राहुल गांधी ने जमीन उपलब्ध होने का खुलासा करने के साथ पेपर मिल में करीब दो हजार को प्रत्यक्ष व आठ हजार लोगों को परोक्ष रोजगार मिलने का एलान किया था। अमेठी के लोगों को लगता था कि इंडो-गल्फ फर्टिलाइजर्स, बीएचईएल और एचएएल जैसे बड़े प्रतिष्ठान की तुलना में यह ऐसी फैक्ट्री होगी, जिसमें कम पढ़े-लिखे लोगों को भी रोजगार का अवसर मिलेगा।
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 हालांकि मेगा फूड पार्क की तरह अमेठी के लोगों का यह सपना भी टूट गया है। यह मिल अब महाराष्ट्र के रत्नागिरि  स्थानांतरित होगी। मेगा फूड पार्क निरस्त करने के पीछे केंद्र सरकार ने जमीन की अनुपलब्धता का हवाला दिया था लेकिन हिंदुस्तान पेपर मिल के लिए यूपीएसआईडीसी ने 188 एकड़ जमीन औद्योगिक क्षेत्र उतेलवा में आवंटित कर रखी है। यूपीएसआईडीसी के तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक आरएस पाठक पूर्व में ही मिल के लिए जमीन की उपलब्धता की पुष्टि कर चुके हैं। वहीं कांग्रेस के जिलाध्यक्ष योगेंद्र मिश्र का दावा है कि हिंदुस्तान पेपर मिल जमीन के बदले 30 करोड़ में 12 करोड़ रुपये यूपीएसआईडीसी को भुगतान कर चुकी है।
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