सीएचसी जयसिंहपुर पर तैनात डॉ. घनश्याम त्रिपाठी की शनिवार शाम दबंगों ने पीट-पीट कर हत्या कर दी। यही नहीं दुस्साहस दिखाते हुए टेंपो पर लादकर घर भिजवा दिया। मेडिकल कॉलेज में उनकी मौत की पुष्टि हुई। इस घटना से पूरे शहर में सनसनी है। एसपी समेत आला अफसरों ने डॉक्टर की पत्नी का बयान दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी।
करीब 56 वर्षीय डॉ. घनश्याम त्रिपाठी शनिवार शाम लगभग चार बजे ड्यूटी से शास्त्रीनगर स्थित आवास पहुंचे थे। पत्नी नीता त्रिपाठी के अनुसार उन्होंने बताया कि उन्हें नारायणपुर निवासी अजय नारायण सिंह ने बुलाया है। इसलिए वह घर से सब्जी का पैसा लेकर निकल गए।
नीता के अनुसार डॉ. घनश्याम ने शास्त्रीनगर में सरस्वती विद्यामंदिर के पीछे दो बिस्वा जमीन अजय नारायण सिंह के पिता जगदीश नारायण सिंह से खरीदी थी। पहले एक बिस्वा जमीन के लिए 25 लाख रुपये दिए थे, फिर दूसरे बिस्वा के लिए भी 25 लाख रुपये दिए। इसके बाद भी उन्हें कब्जा नहीं दिया गया था। पहले एक लाख रुपये और मांगे जो दे दिए गए थे। अब और ढाई लाख रुपये की मांग हो रही थी।
नीता ने बताया कि करीब साढ़े सात बजे उनके घर के सामने एक टेंपो रुका और उनके पति को बुरी तरह लहूलुहान उतारकर वहां से भाग गया। वे केवल इतना बोल पाए कि उन्हें अजय नारायण सिंह ने मारा है। इसके बाद अस्पताल लाने पर डॉक्टरों ने उनकी मौत की पुष्टि कर दी।
इस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक सोमेन बर्मा, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव समेत अनेक अफसर और पुलिस बल अस्पताल पहुंच गया। वहीं पर पुलिस अधिकारियों ने डॉक्टर की पत्नी का बयान दर्ज किया।
पत्नी बोली- अजय नारायण सिंह ने मारा
मेडिकल कॉलेज में मोर्चरी के पास डॉक्टर की पत्नी नीता त्रिपाठी ने पुलिस अधीक्षक सोमेन बर्मा को रोते-रोते बताया कि उनके पति को बुरी तरह मारने के बाद टेंपो से भेज दिया गया था। टेंपो चालक उन्हें घायल अवस्था में उतारकर बिना पैसा लिए भाग गया था। नीता ने बताया कि उनके पति बिल्कुल मरणासन्न थे और बार-बार पानी मांग रहे थे। वे केवल इतना कह पाए कि उन्हें अजय नारायण सिंह ने मारा है।
बेहद सीधे और सज्जन थे डॉ. घनश्याम
डॉक्टर घनश्याम तिवारी जयसिंहपुर सीएचसी पर संविदा पर मेडिकल ऑफिसर थे। करीब तीन वर्ष पहले उनकी तैनाती हुई थी। 56 वर्षीय तिवारी इसके पहले पीएचसी बेलहरी में भी रह चुके थे। शनिवार सुबह सीएचसी आए थे। करीब दो बजे वह सुल्तानपुर के लिए रवाना हो गए थे। मूल रूप से लंभुआ में सखौली कला गांव के निवासी डॉ. त्रिपाठी शास्त्रीनगर सुल्तानपुर में अपने परिवार के साथ रहते थे। उनके दो बेटे हैं। सीएचसी पर तैनात फार्मासिस्ट कयूम हदा अंसारी ने बताया कि वे बड़े सज्जन व्यक्ति थे। अपने काम से काम रखते थे उनका कभी किसी से कोई विवाद नहीं हुआ था।
बदमाशों से पुलिस का खौफ खत्म
प्रापर्टी विवाद में हुई हत्या में जिन लोगों का नाम आ रहा है, उनके खानदान के लोग सत्तारूढ़ दल में अहम पदों पर रहे हैं। भाजपा में इनकी ऊंची पहुंच बताई जाती है। इन लोगों की दबंगई कोई नई घटना नहीं है, इस बात को कोतवाली पुलिस से लेकर पुलिस के आला अधिकारी तक जानते हैं। फिर भी कोई इन पर हाथ डालने या इन पर लगाम लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया था। यही वजह रही कि अचानक इतनी बड़ी वारदात सामने आई।
पुलिस टीमें तलाश रहीं हैं आरोपी को
मुकदमा अभी तक दर्ज नहीं है, किंतु घरवालों से मिली जानकारी के अनुसार आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है। घटनास्थल का अभी तक पता नहीं चला है। पुलिस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में जुटी हुई हैं, जल्द ही आरोपी सलाखों के पीछे होंगे।
- सोमेन बर्मा, पुलिस अधीक्षक