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Sultanpur News: लक्षण दिखते ही कराएं इलाज, फाइलेरिया से हो सकता है बचाव

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सीताकुंड ​स्थित फाइलेरिया अस्पताल में जांच कराने आए मरीज।
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सुल्तानपुर। फाइलेरिया भले ही लाइलाज है, लेकिन लक्षण दिखते ही इलाज शुरू करने व कुछ परहेज कर बीमारी की चपेट में आने से बचा जा सकता है। समय रहते इलाज शुरू कर देने से बीमारी ठीक हो सकती है। ऐसे में चिकित्सक इस बीमारी के मामले में विशेष सतर्कता की सलाह देते हैं।
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जिले के शहरी क्षेत्र व 14 ब्लॉकों में फाइलेरिया के 1318 मरीज चिह्नित हैं। सीताकुंड स्थित फाइलेरिया अस्पताल में रोज पांच से छह मरीज आ रहे हैं। बायोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका त्रिपाठी ने बताया कि फाइलेरिया (हाथी पांव) की स्थिति में इसका केवल कुशल प्रबंधन संभव है। इसके लिए सरकार की ओर से रुग्णता प्रबंधन एवं विकलांगता प्रबंधन (एमएमडीपी) कार्यक्रम के तहत पीड़ित लोगों को किट प्रदान की जाती है। पीड़ित के पैरों की साफ-सफाई एवं उचित व्यायाम के जरिये इसके प्रबंधन की जानकारी दी जाती है।
शहर के फाइलेरिया अस्पताल में हर बुधवार को मरीजों की जांच की जाती है। दूसरे दिन रिपोर्ट आने के बाद मरीजों का इलाज किया जाता है। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है। जब मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति का खून चूसता है, तो माइक्रोफाइलेरिया परजीवी के लार्वा मच्छर के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। फिर ये लार्वा मच्छर के शरीर में विकसित होते हैं और मच्छर जब किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो लार्वा उस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इससे व्यक्ति के शरीर में संक्रमण हो जाता है। फाइलेरिया की रोकथाम के लिए साल में एक बार फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन करना जरूरी है।
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ये हैं फाइलेरिया के लक्षण
फाइलेरिया के लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द और त्वचा पर दाने या खुजली शामिल है। बीमारी बढ़ने पर अंगों में गंभीर सूजन आ जाती है, जिससे हाथी पांव जैसी स्थिति हो सकती है। दवा खाने के दौरान, दही, नीबू, चावल आदि का सेवन बंद कर दें।
सबसे अधिक बल्दीराय तो दोस्तपुर में कम हैं मरीज
जिले के बल्दीराय में 195 व दोस्तपुर में 25 फाइलेरिया के मरीज हैं। इसके अलावा कुड़वार में 83, कूरेभार 146, भदैंया 185, धनपतगंज 80, मोतिगरपुर 49, कादीपुर 112, अखंडनगर 96, करौंदीकला 46,पीपी कमैचा 30, जयसिंहपुर 36, दूबेपुर 105,लंभुआ 70, व शहरी क्षेत्र में 60 मरीजों का इलाज चल रहा है।
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