सुल्तानपुर। हत्या का मुकदमा दर्ज करने के लिए दी गई अर्जी को सीजेएम कोर्ट से खारिज करने के आदेश को चुनौती देने वाली निगरानी अर्जी फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश पीके जयंत ने खारिज कर दी है। मृतक के ससुर ने मां-बाप समेत अन्य पर हत्या करने का आरोप लगाया था। मामला पीपरपुर थाने के घोरहा गांव से जुड़ा है।
गांव निवासी रामबरन के पुत्र मनीष यादव की शादी 11 मई 2017 को धम्मौर थाने के ग्राम रेवती मिश्र का पुरवा निवासी दयाराम की पुत्री के साथ हुई थी। आरोप है कि घर में संपत्ति को लेकर विवाद होता रहता था। इसी कारण मनीष यादव ने वर्ष 2018 में अपनी पत्नी को मायके ले जाकर छोड़ दिया था। उसने हिस्सेदारी का मामला सुलझने के बाद पत्नी को वापस लाने का वादा किया था। 16 मई 2019 को मनीष यादव की मौत हो गई थी।
मृतक मनीष यादव के ससुर दयाराम ने उसके पिता रामबरन, मां प्रेमा देवी, भाई नीतीश कुमार, बहन कंचन और मुंशीगंज थाने के ककरहिया निवासी रिश्तेदार वीरेंद्र कुमार व अमेठी कोतवाली के कमासिन निवासी मनीष कुमार पर हत्या करने का आरोप लगाते हुए हत्या का केस दर्ज करने के लिए सीजेएम कोर्ट में अर्जी दी थी।
अधिवक्ता रवि शुक्ल ने बताया कि सीजेएम कोर्ट ने 17 सितंबर 2019 को अर्जी खारिज कर दी थी। मनीष यादव ने आत्महत्या की थी। उसके ससुर ने इसे हत्या का मामला बताते हुए अर्जी दी थी। सीजेएम के आदेश को दयाराम ने जिला जज की कोर्ट में चुनौती दी थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश पीके जयंत ने निगरानी अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि सीजेएम ने पुलिस रिपोर्ट पर विश्वास करके अर्जी खारिज करके कोई त्रुटि नहीं की है।