सुल्तानपुर। फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के जज राकेश यादव की अदालत ने शुक्रवार को किशोरी के अपहरण के आरोप से जुड़े करीब 11 साल पुराने मामले में अपना फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी सुशील उपाध्याय को दोषी मानते हुए चार साल के कठोर कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने साक्ष्य के अभाव में दो महिला आरोपियों को बरी कर दिया है।
कोतवाली देहात थाने के एक गांव निवासी पीड़िता के पिता ने दो जुलाई साल 2014 की घटना बताते हुए स्थानीय थाने के ही एक गांव के रहने वाले आरोपी सुशील उपाध्याय व उनकी भाभी मिथिलेश सहित अन्य के खिलाफ अपनी 17 वर्षीय पुत्री के अपहरण व अन्य आरोपों में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपी सुशील उपाध्याय व उनकी मां शांति देवी व भाभी मिथिलेश कुमारी के खिलाफ आरोप-पत्र पेश किया। इस मामले की सुनवाई एफटीसी प्रथम की कोर्ट में हुई। आरोपी सुशील को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपहरण का दोषी मानते हुए सजा सुनाई, जबकि आरोपी सास-बहू को बरी कर दिया है। संवाद