सुल्तानपुर। चर्चित मनगू हत्याकांड के मामले में सोमवार को एडीजे चतुर्थ त्रिभुवन नाथ पासवान ने पूर्व मंत्री के पीआरओ व कांग्रेस नेता और पांच अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। कोर्ट में अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ सबूत पेश नहीं कर पाया है।
कूरेभार थाना क्षेत्र के दहलवा धर्मदासपुर गांव का मनगू हसन 22 अक्तूबर 2009 को इसी थाने के नंदापुर सरायगोकुल गांव में भैंस चोरी के आरोप में पकड़ा गया था। उसकी पिटाई करने का आरोप ग्रामीणों पर लगा था। पुलिस ने गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था जहां उसकी मौत हो गई थी।
पुलिस ने मनगू की पत्नी शबाना की तहरीर पर गैरइरादतन हत्या का केस दर्ज किया था। इसमें पूर्व मंत्री जय नारायण तिवारी के पीआरओ रहे कांग्रेस नेता कृपाशंकर तिवारी, उनके भाई प्रभाकर तिवारी, पुत्र राजीव उर्फ राजू और गांव के राम अधार व त्रिलोकीनाथ को आरोपी बनाया गया था।
शबाना ने आरोप लगाया था कि उनके पति की लाठी-डंडे से पिटाई की गई थी जिससे उनकी मौत हो गई। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश नौ गवाहों से बचाव पक्ष के अधिवक्ता केशरी प्रसाद त्रिपाठी ने जिरह की। जिरह में सात गवाह पक्षद्रोही हो गए थे। इससे अभियोजन पक्ष कोर्ट में केस साबित नहीं कर पाया। सोमवार को कोर्ट ने सभी छह आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी करने का फैसला सुनाया।
राजनीतिक रंजिश में दर्ज कराया गया था केस
पूर्व मंत्री के पीआरओ व कांग्रेस नेता कृपा शंकर तिवारी ने बरी होने के बाद कहा कि उन्हें कोर्ट से न्याय मिलने का भरोसा था। उनका कहना है कि राजनीतिक रंजिश में फर्जी केस दर्ज कराया गया था। उनका आरोप है कि मनगू की मौत पुलिस की पिटाई से हुई थी।
कुड़वार के पूर्व एसओ पर लगा था पिटाई का आरोप
भैंस चोरी करने के आरोप में पकड़े गए मनगू को कुड़वार थाने ले जाया गया था। उस समय कुड़वार थाने में तैनात रहे एसओ मोहम्मद मुस्तकीम चौहान पर मनगू की पिटाई करने का आरोप लगा था। इसकी शिकायत केस में आरोपी बनाए कृपा शंकर तिवारी ने हाईकोर्ट से लेकर अन्य उच्चाधिकारियों से की थी। हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश पर हुई सीबीसीआईडी जांच में एसओ को क्लीनचिट मिल गई थी।