सुल्तानपुर। व्यापारी को गाली देने, धमकाने व बलवा के मामले में चांदा के पूर्व बसपा विधायक सफदर रजा को एमपी-एमएलए की विशेष अदालत के मजिस्ट्रेट योगेश कुमार यादव ने शुक्रवार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के सभी गवाह कोर्ट में गवाही देने से मुकर गए थे। 29 साल बाद केस से बरी होने पर पूर्व विधायक को बड़ी राहत मिल गई है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता हसन अली के मुताबिक कोतवाली नगर क्षेत्र के सिरवारा रोड निवासी व्यापारी कमल सेठ ने 13 सितंबर 1994 को चांदा के पूर्व बसपा विधायक सफदर रजा, सदर क्षेत्र (अब सुल्तानपुर) के पूर्व सपा विधायक बरकत अली, उनके भतीजे मो. अहमद व पूर्व सपा जिलाध्यक्ष कमरुज्जमा फौजी के खिलाफ बलवा, लूट, गाली देने व धमकाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था।
कमल सेठ का आरोप था कि शहर के गल्लामंडी स्थित उनकी इलेक्ट्राॅनिक की दुकान पर सपा-बसपा के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने ईंट पत्थर चलाकर तोड़फोड़ की थी। इसमें उन्हें चोट आई थी। कमल सेठ ने लूटपाट करने का भी आरोप लगाया था।
मुकदमे में अभियोजन पक्ष से पेश सात गवाहों से बचाव पक्ष के अधिवक्ता हसन अली व राम अवध ने जिरह की। जिरह में मुकदमा दर्ज कराने वाले कमल सेठ गवाही देने से मुकर गए थे। उन्होंने घटना में पूर्व विधायक सफदर रजा के शामिल होने से ही इंकार कर दिया था।
अभियोजन पक्ष के अन्य गवाह उमेशचंद्र जायसवाल, राजेंद्र सेठ, भरतलाल, सुनील श्रीवास्तव, प्रदीप कुमार व राजेंद्र प्रसाद भी गवाही देने से मुकर गए थे। बचाव पक्ष की ओर से पेश दो गवाहों जुनैद अहमद व रामपियारे ने घटना के समय पूर्व विधायक के लंभुआ में बसपा की मीटिंग में हाेने की गवाही दी थी।
शुक्रवार को कोर्ट ने पूर्व विधायक सफदर रजा को साक्ष्य के अभाव में बरी करने का फैसला सुनाया। मामले में आरोपित सपा के पूर्व विधायक बरकत अली, उनके भतीजे मो. अहमद व पूर्व सपा जिलाध्यक्ष कमरुज्जमा फौजी की मुकदमे के दौरान मौत हो गई है।