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एक बार फिर दो परिवारों के बीच अध्यक्ष पद की लड़ाई की बढ़ी संभावना

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सुल्तानपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव एक बार फिर दो परिवारों के बीच होने के आसार बढ़ गए हैं। एक तरफ शिवकुमार सिंह की पत्नी व निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष उषा सिंह व दूसरी ओर भद्र परिवार की बेटी अर्चना सिंह के बीच मुकाबला होने की संभावना बढ़ गई है।
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चुनाव में सिर्फ तीन सीट पर सिमटने से सत्तासीन भाजपा के सामने संकट खड़ा हो गया है, जबकि निर्दलीय अर्चना सिंह के सामने सभी विकल्प खुले हैं। जिला पंचायत सदस्य के नतीजों की घोषणा के बाद फिलहाल कुछ ऐसी ही तस्वीर उभर कर सामने आ रही है।
वर्ष 2016 में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद सामान्य था। प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सत्ता थी। सपा से शिवकुमार सिंह ने अपनी पत्नी ऊषा सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रत्याशी बनवाने में सफलता प्राप्त कर ली थी।
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केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने तब मजबूत प्रत्याशी के तौर पर ऊषा सिंह के मुकाबले पार्टी के समर्थित प्रत्याशी रहे यशभद्र सिंह मोनू को उतारा था। चुनाव में गड़बड़ी के भी आरोप लगे लेकिन येन-केन प्रकारेण जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर उषा सिंह काबिज हो गईं।
प्रदेश में 2017 में भाजपा के आने के बाद अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। हालांकि शिवकुमार सिंह व पूर्व मंत्री विनोद सिंह के मैनेजमेंट की वजह से अविश्वास प्रस्ताव सफल नहीं हो सका। बाद में ऊषा सिंह स्वयं भाजपा के खेमे में चली गईं।
पार्टी के खेमे में पहुंचने से भाजपा ने वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में उन्हें वार्ड नंबर 25 से डीडीसी प्रत्याशी के तौर पर उतारा और वे रिकॉर्ड मतों से जीतने में कामयाब भी हुईं। उनके जीतने व अध्यक्ष पद की दावेदारी करने वाले अन्य भाजपा समर्थित प्रत्याशियों की हार की वजह से इस बार फिर ऊषा सिंह के भाजपा समर्थित अध्यक्ष प्रत्याशी बनने के आसार बढ़ गए हैं।
दूसरी तरफ इसौली के पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू व पूर्व ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह मोनू की छोटी बहन अर्चना सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष पद की प्रबल दावेदार हैं। बस्ती जनपद में ब्याही अर्चना सिंह के पति अधिकारी हैं। ऐसी स्थिति में उनका डीडीसी के चुनाव में उतरना अध्यक्ष पद की ओर ही संकेत दे रहा है। इसे देखते हुए एक बार फिर इन्हीं दो परिवारों के बीच अध्यक्ष पद की लड़ाई होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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