संवाद कार्यक्रम में डीजे पर चर्चा करते समाजसेवी। -संवाद
सुल्तानपुर। त्योहार आस्था और उल्लास के प्रतीक हैं, इन्हें कानफोड़ू शोर का माध्यम नहीं बनने देना चाहिए। दुर्गापूजा और प्रतिमा विसर्जन के दौरान तेज आवाज में बजने वाले डीजे पर अंकुश लगाने की मांग सोमवार को अमर उजाला संवाद में उठी।
संवाद न्यूज एजेंसी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में समाजसेवियों ने ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए प्रशासन से सख्ती बरतने और निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। वरिष्ठ समाजसेवी नितिन मिश्रा ने कहा कि तेज आवाज से बुजुर्गों, हृदय रोगियों और स्कूली बच्चों को परेशानी होती है।
अधिवक्ता अमोल वाजपेयी ने कहा कि प्रतिमा विसर्जन के दौरान रातभर डीजे बजने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है और मरीजों को आराम नहीं मिल पाता। सौरभ अग्रवाल ने कहा कि सुल्तानपुर में डीजे की आवाज 120 डेसिबल से अधिक तक पहुंच जाती है। ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए निर्धारित मानकों का पालन जरूरी है।
अनुराग गुप्ता ने कहा कि दुर्गापूजा शक्ति की उपासना का पर्व है, लेकिन कुछ लोग इसे डीजे प्रतियोगिता बना देते हैं। अधिवक्ता जीतेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि मां की आराधना ढोल-मजीरे और भजनों से होनी चाहिए, न कि कानफोड़ू संगीत से।
अपराध निरोधक समिति के सचिव अमर बहादुर सिंह ने कहा कि सुल्तानपुर में डीजे की आवाज 120 डेसिबल से अधिक तक पहुंच जाती है। शिवाकांत और सचिन सिंह ने शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने पर चिंता जताई।
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रिकॉर्ड करेंगे डीजे की ध्वनि तीव्रता
सुमित भारती सहित संवाद में शामिल समाजसेवियों ने जिला प्रशासन से दुर्गापूजा से पहले पूजा समितियों और डीजे संचालकों के साथ बैठक कर प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की। उन्होंने मानकों का उल्लंघन करने वालों के डीजे उपकरण जब्त करने पर जोर दिया। घर सुल्तानपुर फाउंडेशन ने राघवेंद्र सिंह के नेतृत्व में अधिवक्ताओं की टीम बनाई है। यह टीम वीडियो के माध्यम से डीजे की ध्वनि तीव्रता रिकॉर्ड करेगी। निर्धारित सीमा से अधिक आवाज मिलने पर प्रशासन को सूचना दी जाएगी। समाजसेवियों ने कहा कि त्योहार मनाते समय दूसरों की सुविधा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।