सुल्तानपुर। राज्यसभा सदस्य डॉ. संजय सिंह के पुत्र अनंत विक्रम सिंह के जेल जाने के साथ ही पिता-पुत्र में सुलह की संभावनाएं भी कम हो गईं। जेल जाने से पहले अनंत विक्रम सिंह ने इसके लिए पिता संजय सिंह व अमीता सिंह को जिम्मेदार बताकर अपनी नाराजगी भी उजागर कर दी है।
अपने पिता की कांग्रेस की सियासत के बिल्कुल विपरीत धारा भाजपा में शामिल होकर अनंत विक्रम सिंह ने पहले ही यह तय कर दिया था कि पिता-पुत्र की सियासी राहें अब जुदा हैं। भूपति भवन का विवाद बीते साल 25 जुलाई को तब शुरू हुआ था जब डॉ. संजय सिंह के पुत्र अपनी मां गरिमा सिंह, पत्नी शांभवी और बेटे के साथ महल में दाखिल हुए थे। उसके बाद शुरू हुए तनाव की परिणति 14 सितंबर को सिपाही विजय मिश्र की मौत के रूप में हुई। तब से संजय सिंह के पुत्र अनंत विक्रम सिंह सपरिवार भूपति भवन में ही रह रहे हैं।
इस दौरान संजय सिंह और अमीता सिंह से उनका कोई विवाद भी सामने नहीं आया। हालांकि इसी बीच अनंत विक्रम सिंह ने लखनऊ में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली जबकि पिता संजय सिंह और अमीता सिंह कांग्रेस से जुड़े हैं। संजय सिंह वर्तमान में कांग्रेस से ही राज्यसभा सदस्य हैं। एक ही क्षेत्र और एक ही भवन में रहने के बाद भी पिता-पुत्र वर्तमान में सियासत की परस्पर विपरीत धारा से जुड़े हैं। इन सबके बावजूद डॉ. संजय सिंह के सियासी कौशल को करीब से जानने वालों को भरोसा था कि देर-सबेर पिता-पुत्र के बीच की दूरी भी कम हो जाएगी।
शनिवार को अनंत विक्रम सिंह की गिरफ्तारी के बाद इस उम्मीद पर भी अविश्वास की परत जम गई। अनंत विक्रम सिंह ने अपनी गिरफ्तारी के लिए सीधे तौर पर अपने पिता डॉ. संजय सिंह और अमीता सिंह को जिम्मेदार बता कर अपने मन का गुबार भी जग जाहिर कर दिया। संजय सिंह और अमीता सिंह ने संयुक्त रूप से बेटे की गिरफ्तारी पर दुख जताकर इसकी भरपाई की कोशिश की लेकिन रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलने के आसार क्षीण ही दिख रहे हैं। उधर, भाजपा अनंत विक्रम सिंह की गिरफ्तारी को सियासी मुद्दा बनाने जा रही है।