सुल्तानपुर। आसमान छू रहे चूनी चोकर के दामों से ग्रामीण अंचल के सदियों पुराने पारंपरिक दुग्ध व्यवसाय से पशुपालक मुंह मोड़ने लगे हैं। दुधारू मवेशियों की खुराक पर होने वाले खर्च के हिसाब से पशुपालकों को दूध का भाव नहीं मिल पा रहा है। गांव-गिरांव में दूधिए पशु पालकों से गाय का दूध मिनरल वाटर के भाव 20 से 25 रुपये प्रति लीटर खरीद रहे हैं।
पिछले दो वर्षों से पशुपालकों को दुग्ध उत्पादन से होने वाली आय से ज्यादा पशुओं के रख-रखाव और उनकी खाना खुराकी पर खर्च करना पड़ रहा है। बड़ी दूध डेयरियों को छोड़ दिया जाए तो दुग्ध उत्पादन में 75 प्रतिशत भागीदारी सीमांत, लघु सीमांत और भूमिहीन किसानों की है। इन लोगों को दूध सरकारी निर्धारित रेट पर बेच पाना मुश्किल हो गया है। गांव के छोटे मझोले पशुपालक ज्यादातर बिचौलियों, डिब्बा लेकर गांव-गांव दूध खरीदने वालों का शिकार बने हैं। लगातार दो वर्षों से लघु सीमांत पशुपालकों को दूध की कीमत आज भी वही मिल रही है। कई पशुपालक ऐसे हैं, जिन्हें पशुओं को खिलाने के लिए सब कुछ मोल लेना पड़ रहा है। इस तरह के पशुपालकों के लिए दुग्ध व्यवसाय घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
पशुओं में बीमारी से घटा दुग्ध उत्पादन
धनपतगंज। क्षेत्र के चकिया गांव निवासी लघु सीमांत किसान गंगासागर का कहना है कि पहले 25 किलोग्राम की पशु आहार की बोरी 410 रुपये में मिल जाती थी। अब इसका भाव 560 रुपये पहुंच गया है। 850 से 900 रुपये में 45 किलो. वाली चूनी इस समय 1300 रुपये में बिक रही है। वहीं खली का रेट 18 से बढ़कर 26 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया है। पशुओं में विभिन्न बीमारियों के चलते दुग्ध उत्पादन भी घट गया है। पहले प्रतिदिन 50 से 60 लीटर दूध निकल जाता था। अब मुश्किल से 20 से 25 लीटर दूध ही निकल पा रहा है।
मिनरल वाटर के बराबर बिक रहा दूध
धनपतगंज। पूरे हेम सिंह पुरवा निवासी दीपू सिंह कहते हैं कि पशु आहार, चूनी चोकर का दाम तो बढ़ गया लेकिन गाय का दूध आज भी मिनरल वाटर के रेट में 20 से 25 रुपये लीटर ही गांव का दूधिया खरीद रहा है। तकनीकी खेती के दौर में कंबाइंड मशीन से फसल कटाई के कारण भूसा का रेट 400 से बढ़कर 1000 रुपये प्रति क्विंटल पहुंचा था। वर्तमान में भूसा का रेट 1200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक रहा है।
दो गाय, एक बछिया व बछड़े का रोज 300 रुपये खर्च
करौंदीकलां। बौढ़ियाबालमऊ निवासी अवधेश यादव के पास दो साहीवाल गाय, एक बछिया व एक बछड़ा है। उन्होंने बताया कि इनका प्रतिदिन खर्च 300 रुपये है। दोनों गाय लगभग 14 लीटर दूध देती है, जो पास की बाजार परशुरामपुर में डेयरी पर 35 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक जाता है। इसी गांव के शेर बहादुर सिंह गो-आश्रय स्थल से दो गाय ले आए थे। खेती लायक जमीन नहीं होने के चलते पुआल व गेहूं का भूसा दोनों खरीदना पड़ रहा है। हालांकि सरकार की तरफ से अनुदान भी मिलता है। इसके बाद भी गायों के पालन के लिए उन्हें अपने पास से पैसे लगाने पड़ रहे हैं।
दुधारू गाय को प्रतिदिन खिलाने वाला चारा
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. भूदेव सिंह ने कहा कि एक स्वस्थ दुधारू गाय को प्रतिदिन पांच किलो भूसा, 10 किलो हरा चारा और दो किलो चूनी चोकर खिलाना चाहिए। इसके अलावा नौ से 10 लीटर दूध देने वाली गाय को भूसा पांच किलो, हरा चारा 10 से 15 किलो और चूनी, चोकर, खली, पशु आहार की मात्रा दो से तीन किलो कर देनी चाहिए। साथ ही दूध देने वाली गाय को सुबह-शाम 25 ग्राम कैल्सियम पाउडर देना जरूरी है। इससे दूध की मात्रा बढ़ती है।