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चार वर्ष बाद भी ट्रॉमा सेंटर में नहीं शुरू हो सकी इमरजेंसी सेवा

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सुल्तानपुर। रोजाना हाईवे पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए शासन की ओर से चार वर्ष पूर्व जिले को मिला ट्रॉमा सेंटर विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में ठप पड़ा है। यहां गंभीर रूप से घायलों को आपातकालीन सेवा नहीं मिल पाती है। ट्रॉमा सेंटर मात्र ओपीडी तक सिमट गया है।
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जिले में गंभीर रूप से घायल या गोलीकांड के शिकार हुए लोगों को पहले की तरह जिला अस्पताल से ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर किया जा रहा है। ऐसे में अधिकांश लोगों की समय से उपचार नहीं मिल पाने के कारण रास्ते में ही मौत हो जाती है। कई बार स्वास्थ्य विभाग ने शासन से विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की मांग की, लेकिन वह आज तक पूरी नहीं हुई।
प्रति वर्ष इलाहाबाद-फैजाबाद और लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर सैकड़ों लोग सड़क दुर्घटनाओं में घायल होते हैं। इनमें ज्यादातर समय पर उचित उपचार नहीं मिल पाने से मौत के शिकार हो जाते हैं।
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हाईवे पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को शासन ने गंभीरता से लेते हुए चार वर्ष पूर्व सुल्तानपुर जिले में एक जनपद स्तरीय ट्रॉमा सेंटर खोलने का निर्णय लिया था। हाईवे पर स्थित अमहट के पास स्वास्थ्य विभाग की सात हजार वर्गफुट भूमि पर ट्रॉमा सेंटर का निर्माण भी कराया गया।
ढाई करोड़ रुपये की लागत से बने ट्रॉमा सेंटर में 10 बेडों की व्यवस्था है। ट्रॉमा सेंटर में आईसीयू, सीटी स्कैन मशीन, अल्ट्रासाउंड, वेंटीलेटर मशीन समेत सभी जरूरी उपकरण उपलब्ध होने के बाद भी इसकी सुविधाएं लोगों को नहीं मिल पा रही हैं।
सीएमओ डॉ. चंद्रभूषण नाथ त्रिपाठी ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। इस वजह से इसे चालू नहीं किया जा सका है। ट्रॉमा सेंटर में आर्थोपेडिक और न्यूरो सर्जन के साथ ही 10 चिकित्सकों की तैनाती होनी है।
शासन को कई बार इस बारे में पत्र लिखा गया है। पूरे प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। जब तक विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं मिलेंगे ट्रॉमा सेंटर चालू करा पाना संभव नहीं है। इसके साथ ही ट्रॉमा सेंटर में एक एक्स-रे मशीन भी होनी चाहिए।
प्रयागराज-अयोध्या और लखनऊ-वाराणसी जिले के बीच में स्थित जौनपुर, अमेठी, प्रतापगढ़, अंबेडकरनगर जिले के घायलों को सुल्तानपुर ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध होगी। ये वे जिले हैं, जिनसे लखनऊ और वाराणसी ट्रॉमा सेंटर की दूरी अधिक है। ऐसे में समय पर उपचार नहीं मिलने से ज्यादातर लोगों की मौत हो जाती है।
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