ऐतिहासिक दुर्गा पूजा महोत्सव में सोमवार को मूर्ति विसर्जन का सिलसिला शुरू हुआ। बैरिकेडिंग को तोड़कर शहर की पहले नंबर की देवी प्रतिमा शाम छह बजे आदि गंगा गोमती में विसर्जित की गई। सोमवार को सीताकुंड घाट पर पूरा शहर मां के अंतिम दर्शन को उमड़ पड़ा। विसर्जन शोभा यात्रा में अबीर-गुलाल से सराबोर युवा मां के भजनों पर थिरकते हुए विसर्जन स्थल तक पहुंचे और वहां नम आखों से देवी मां को विदाई दी गई। गोमती नदी स्थित सीताकुंड घाट पर मंगलवार दोपहर तक विसर्जन कार्यक्रम चलेगा। रविवार की देर रात तक रथ में सवार मां अंबे के दर्शन को भक्तों का तांता लगा रहा।
शहर के दुर्गा पूजा महोत्सव के दौरान पंडालों में स्थापित देवी प्रतिमाओं के विसर्जन की शुरुआत सोमवार को शाम पांच बजे के बाद हुई। शहर के ठठेरी बाजार की मां दुर्गा (बड़ी दुर्गा) की पहली मूर्ति शाम करीब छह बजे बैरिकेडिंग को तोड़कर आदि गंगा गोमती में विसर्जित हुई। इसके बाद एक के बाद एक मूर्तियों का विसर्जन अश्रुपूरित नेत्रों के बीच किया गया। विसर्जन के दौरान शहर में देवी मां की शोभा यात्रा के दर्शन व आरती को श्रद्घालुओं का सारी रात व पूरा दिन तांता लगा रहा।
सीताकुंड घाट पर मूर्ति विसर्जन का कार्यक्रम भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंगलवार दोपहर तक चलेगा। मेले की व्यवस्था को लेकर जिले का प्रशासनिक अमला मुस्तैद रहा। एसडीएम दिनेश गुप्त, सीओ बल्दीराय जितेंद्र गिरि सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे थे। सोमवार शाम को सीताकुंड घाट पर देवी मां के अंतिम दर्शन करने के लिए दर्शनार्थियों का रेला उमड़ पड़ा। शोभा यात्रा के दौरान पूरा शहर मेले में तब्दील रहा।