सुल्तानपुर। अब स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ड्रोन उड़ाकर खेतों में कीटनाशक और उर्वरकों का छिड़काव करेंगी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने इस वित्तीय वर्ष के लिए 24 ड्रोन सखियों के चयन का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए समूह की महिलाओं से आवेदन मांगे गए हैं।
पारंपरिक तरीके से हाथों से उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव करने पर खाद की खपत अधिक होने के साथ खेतों की उर्वरा शक्ति पर भी असर पड़ रहा है। शासन ने ड्रोन तकनीक के जरिए छिड़काव की व्यवस्था शुरू की है। इस योजना में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जोड़कर उन्हें रोजगार से जोड़ा जा रहा है। बीते वित्तीय वर्ष में एनआरएलएम के तहत जिले में पांच ड्रोन सखियों का चयन किया गया था, जिन्हें ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण भी दिलाया जा चुका है। योजना का विस्तार करते हुए 24 नई महिलाओं के चयन की प्रक्रिया शुरू की गई है।
जिला मिशन प्रबंधक मोहम्मद जासेफ ने बताया कि इच्छुक स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आवेदन कर सकती हैं। आवेदन मिलने के बाद ड्रोन सखी और उनके सहायकों का चयन किया जाएगा। ड्रोन संचालन प्रशिक्षण के बाद एक उर्वरक कंपनी की ओर से उन्हें ड्रोन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके माध्यम से वे किसानों के खेतों में छिड़काव कर आय अर्जित कर सकेंगी।
इनसेट
ड्रोन तकनीक से किसानों और महिलाओं को फायदा
-कम समय में बड़े क्षेत्र में कीटनाशक व उर्वरक का छिड़काव
-खाद और दवाओं की खपत में कमी
-खेत में सीधे जाने की जरूरत नहीं, स्वास्थ्य जोखिम कम
-फसल पर समान रूप से छिड़काव से उत्पादन बेहतर
-ग्रामीण महिलाओं को तकनीक आधारित रोजगार का अवसर