सुुल्तानपुर। बेहद ऊंचाई पर बसे सुल्तानपुर शहर का भौगोलिक आकार ऐसा है कि यहां पर जलभराव नहीं होता है। मगर नगर पालिका के अफसरों ने शहर का वह हाल कर दिया है, जिससे यहां भी लोगों को जलभराव से जूझना पड़ेगा। क्योंकि शहर के अधिकांश नाले अतिक्रमण और अवैध निर्माण से संकरे हो गए हैं। ऐसे में इन नालों की सफाई होना असंभव हो गया है। फिर भी नगर पालिका के अफसर कागजों में 95 फीसदी सफाई का दावा कर रहे हैं।
नगर पालिका क्षेत्र के 25 वार्डों से निकलने वाला पानी छह प्रमुख नालों से होकर गोमती नदी में मिलता है। इसमें हथियानाला, गंदानाला, बढ़ैयावीर नाला, गभड़िया नाला, करौंदिया प्रथम व करौंदिया द्वितीय नाला शामिल हैं, जिनकी लंबाई 13.6 किलोमीटर है। इसके अलावा शहर में 22 मझोले नाले भी हैं, जिनकी लंबाई 19 किलाेमीटर है। छोटी नालियों की सफाई तो होती रहती है, लेकिन इन बड़े नालों की सफाई का काम मानसून से पहले कराया जाता है।
कागजों में नगर पालिका ने इन नालों की सफाई 95 फीसदी पूरी कर दी है, किंतु इनमें से पानी नहीं निकल सकता। क्योंकि अधिकांश बड़े व मझोले नालों पर कई जगह मकान और दुकान बनाकर अतिक्रमण कर लिया गया है, जिससे इन भवनों के नीचे नालों में सिल्ट भरी हुई है। जब तक यह सिल्ट नहीं निकाली जाएगी, तब तक नालों का पानी का रास्ता साफ नहीं होगा। किंतु नगर पालिका के पास नालों से अतिक्रमण हटाकर पूरी तरह नाले साफ करने की कोई योजना ही नहीं है। यहां तक कि नगर पालिका के अधिकारियों को यह तक पता नहीं है कि आखिर कितनी जगह अतिक्रमण है। ऐसे में शहर के लोगों को कई जगह जलभराव से जूझना पड़ेगा।
वर्जन
शहर में 95 फीसदी नालों की सफाई हो गई है। सर्वे भी कराया जा रहा है। यदि किसी स्थानीय व्यक्ति को नालों पर हुए अतिक्रमण से जलभराव व अन्य समस्या हो रही है तो उसकी शिकायत दर्ज करा सकता है। इस पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
- लाल चंद्र सरोज, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका