सुल्तानपुर। जिला कारागार में दो बंदियों की मौत के मामले में जेल प्रशासन घिरता जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने अमर उजाला की उस खबर पर भी मुहर लगा दी है। जिसमें बताया गया था कि बंदियों की मौत जेल प्रशासन के दावे से पहले ही हो गई थी। शासन ने भी अमर उजाला की खबर का संज्ञान लेते हुए डीएम से रिपोर्ट तलब कर ली। डीएम ने जेल पहुंचकर खबर में उठाए गए बिंदुओं पर तथ्य एकत्र कर शासन को रिपोर्ट भेज दी है।
शुक्रवार के अंक में अमर उजाला ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से यह खबर दी थी जिसमें बताया गया था कि बंदियों की मौत दो दिन पहले ही हो गई थी। इसके अलावा खबर में जेल प्रशासन की लापरवाही और घटना से जुड़े कई अन्य सवाल भी उठाए गए थे।
शासन ने इसका संज्ञान लेते हुए जब जिलाधिकारी से रिपोर्ट मांगी तो वे दोबारा जेल पहुंची। वहां उन्होंने जिला कारागार में घटना के समय वाच टावर पर ड्यूटी के दौरान तैनात बंदी रक्षक, सीसीटीवी के संचालन, दोनों बंदियों की बैरक से घटना स्थल की दूरी समेत अन्य बिंदुओं की पड़ताल की।
सूत्रों के मुताबिक दो कैदियों की बैरक से घटना स्थल की दूरी करीब पांच मीटर है। सवाल यह उठता है कि योग दिवस के दिन दो बंदी कैसे अन्य बैरकों को पार करते हुए उतनी दूर पहुंचे थे। जिला कारागार में पहुंच कर डीएम ने घटना से जुड़े सभी बिंदुुओं व चल रही कार्रवाई के संबंध में अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी है।
जिला मजिस्ट्रेट जसजीत कौर ने बताया कि घटना की न्यायिक जांच मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में चल रही है। घटना के संबंध में मीडिया में आई खबरों व अन्य बिंदुओं की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
उधर, पुलिस अधीक्षक सोमेन बर्मा ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई है। जिसमें मौत के समय को लेकर संशय है। किंतु प्रथम दृष्टया ऐसा लग रहा है कि पोस्टमार्टम में हुई देरी के कारण भी ऐसा हो सकता है। उन्होंने बताया कि बाकी बातें न्यायिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगी।
जेल अधीक्षक ने चुप्पी साधी, डीआईजी ने किया बचाव
जेल मे बंदियों की मौत के मामले को खुलकर आत्महत्या बताने वाले और किसी तरह की लापरवाही से साफ इन्कार करने वाले जेल अधीक्षक उमेश प्रताप सिंह ने शुक्रवार को चुप्पी साध ली। उन्होंने फोन भी नहीं रिसीव किया। माना जा रहा है कि जांच के बढ़ते दायरे से अब उन पर शिकंजा कसने वाला है।
हालांकि घटना के बाद जांच को पहुंचे डीआईजी जेल हेमंत कुटियाल ने कहा कि मौत के समय को लेकर जो भ्रम है। वह इसलिए भी हो सकता है कि उस दिन गर्मी बहुत अधिक थी और शायद पोस्टमार्टम हाउस में संभवत: डीप फ्रीजर भी नहीं था। हालांकि अमर उजाला ने शुक्रवार की खबर में स्पष्ट किया था कि पोस्टमार्टम हाउस का फ्रीजर भी ठीक था और शव उसमें रखा गया था।