भारी बारिश से गोमती नदी के तटवर्ती इलाकों में जलभराव का संकट गहरा गया है। उफान पर आई गोमती का जलस्तर बढ़ने से नदी का पानी आवासीय क्षेत्रों में प्रवेश कर गया है। किसानों की सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न होने से मवेशियों के सामने चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है। दवाओं का छिड़काव नहीं किए जाने से हैंडपंप व कुओं का पानी दूषित होने लगा है। जिला प्रशासन के हस्तक्षेप नहीं करने से समस्या विकराल होती जा रही है। प्रभावित गांव के लोगों ने समस्या का निदान नहीं होने पर आंदोलन की बात कही है।
तीन दिन पहले हुई तेज बारिश से गोमती नदी के तराई इलाके का जलस्तर बढ़ गया है। धनपतगंज विकास क्षेत्र के दक्षिणी-पूर्वी सीमा से गुजरने वाली गोमती नदी के तटवर्ती अमऊ जासरपुर, कोलिया, सिंहोरिया, जज्जौर, शुक्लाने, धर्मदासपुर समेत कई गांवों में जलभराव की समस्या बरकरार है। किसानों की सैकड़ों बीघा चारा समेत अन्य फसलें पानी में डूब गई हैं। खेतों में जलभराव से मवेशियों के समक्ष चारे का संकट खड़ा हो गया है।
खेतों में इतना अधिक पानी हो गया है कि लोगों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रभावित गांवों में जगह-जगह हुए जलभराव व गंदगी से हैंडपंप व कुओं का पानी दूषित होने लगा है। दूषित पानी पीने से लोगों में संक्रमण का खतरा बढ़ने लगा है। तीन दिन बीतने के बाद भी स्वास्थ्य महकमा प्रभावित गांवों में दवाओं के छिड़काव को लेकर गंभीर नहीं है।
तटीय इलाके में गोमती की कटान पर प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से और गांव भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। प्रभावित गांव के ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही समस्या का निदान नहीं हुआ तो सड़क पर उतर प्रदर्शन किया जाएगा।