बीते साल की तरह इस बार भी गोमती नदी में देवी प्रतिमाओं के विसर्जन का प्रतिबंध ऐन मौके पर धराशायी हो गया। भक्तों के सैलाब के आगे प्रशासन की एक न चली।
भक्तों ने गोमती नदी में प्रतिमाओं का विसर्जन कर नम आंखों से देवी दुर्गा को विदाई दी। हालांकि कुछ मूर्तियां तैयार किए गए विसर्जन कुंड में भी विसर्जित की गईं। देवी प्रतिमाओं की विसर्जन शोभायात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। भक्ति धुनों के बीच गाजे-बाजे के साथ देवी प्रतिमाएं घाट तक पहुंचीं। शहर में शोभायात्रा की जगह-जगह आरती उतारी गई। महिलाओं ने घरों की छतों से प्रतिमाओं पर फूल बरसाए। विसर्जन बृहस्पतिवार की सुबह तक चलने की संभावना जताई जा रही है।
बुधवार को देवी प्रतिमाओं का विसर्जन सुबह से ही शुरू हो गया। क्रमवार मूर्तियों के विसर्जन यात्रा सीताकुंड घाट पहुंचने की व्यवस्था की गई थी। हालांकि बूंदाबांदी के चलते दूर-दराज से आई प्रतिमाओं को लेकर भक्तगण बगैर नंबर के ही घाट पर पहुंच गए। वहां पर बने विसर्जन कुंड में देवी प्रतिमाओें को विसर्जित कर दिया गया। दोपहर 12 बजे तक शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से बगैर नंबर के आई 40 से अधिक समितियों की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा चुका था। सीताकुंड घाट पर बने विसर्जन कुंड में दो नौकाओं को मूर्तियों के विसर्जन के लिए व्यवस्थित किया गया था। दोपहर बाद तक शहर की बड़ी दुर्गा व अन्य पूजा समितियों की प्रतिमाओं को शहर में भ्रमण कराया गया। देर शाम शहर की प्रतिमाएं सीताकुंड घाट पर पहुंचाई गईं।
देर शाम नदी में विसर्जन की रोक को दरकिनार करते हुए भक्तजन तट पर जा पहुंचे। शुरुआत में पुलिस ने रोक लगाई लेकिन समिति के पदाधिकारी प्रवाहित गोमती की धारा के बीच प्रतिमाओं को विसर्जित करने की मांग पर अड़े रहे। काफी नोक-झोंक के बाद समितियों के कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग पार करते हुए नदी में विसर्जन शुरू कर दिया। फिर एक के बाद एक मूर्तियों का विसर्जन देर रात तक चलता रहा। देर शाम शहर की बड़ी दुर्गा प्रतिमा गोमती नदी में विसर्जित की गई।