सुल्तानपुर। रबी फसलों की बुआई शुरू होते ही अक्तूबर माह में लक्ष्य से अधिक डीएपी व यूरिया समेत अन्य उर्वरकों के आवंटन के बाद भी 19 समितियों व संघ पर खाद का टोटा हो गया है। समितियों पर डीएपी पहुंचते ही किसान खत्म होने की आशंका में कतारों में लग जाते हैं। इससे कई समितियों पर डीएपी खत्म हो गई है। फिलहाल कृषि विभाग की ओर से अभी बफर स्टाॅक में पर्याप्त यूरिया व डीएपी समेत अन्य उर्वरक होने का दावा किया जा रहा है।
जिले में 130 समितियों पर डीएपी व यूरिया भेजने का दावा कृषि विभाग कर रहा है। फिर भी अखंडनगर की पांच समितियों पर डीएपी अभी तक नहीं पहुंची है। इसी तरह पीपीकमैचा के नौ केंद्रों और मोतिगर के हमजाबाद समेत जिले की 19 समितियों पर डीएपी अभी तक नहीं पहुंची है। इसके अलावा करौंदीकलां के अमरेमऊ, कुड़वार, मोतिगरपुर के पारसपट्टी संघ पर डीएपी अभी तक नहीं उपलब्ध हो सकी है।
पूर्व के वर्षों में आए संकट को देखते हुए किसान समितियों पर डीएपी पहुंचते ही टूट पड़ रहे हैं। इससे डीएपी पहुंचते ही समाप्त हो जा रही है। धम्मौर में पहुंची डीएपी खत्म हो गई है। दुबेपुर में पहुंची डीएपी समाप्त होने की कगार पर है। यहीं सि्थति कई समितियों की है। समितियों के सचिवों की ओर से डीएपी के लिए मांग पत्र मुख्यालय भेजा जा रहा है।
इनसेट
उर्वरक का आवंटन व उपलब्धता मीट्रिक टन
उर्वरक- वार्षिक लक्ष्य- अक्तूबर का लक्ष्य- उपलब्धता
यूरिया- 34,915- 1151- 17,130
डीएपी- 15,058- 2602- 7128
एनपीके- 1845- 186-2082
पोटाश- 718 -122- 172
सिंगल सुपरफॉस्फेट-2933- 969-6461
इनसेट
बफर में 3301 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध
जिला कृषि अधिकारी सदानंद चौधरी ने बताया कि लक्ष्य से अधिक उर्वरक अक्तूबर में उपलब्ध हो चुके हैं। इसे 130 समितियों पर भेजा जा चुका है। कुछ संघ पर भेजने की प्रक्रिया चल रही है। अभी बफर गोदाम में करीब 3301 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है।