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Sultanpur News: डेंगू के प्रकोप से पांच गुना तक बढ़ी प्लेटलेट्स की मांग

Fri, 25 Oct 2024 01:30 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
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मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी के बाहर खड़े लोग
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सुल्तानपुर। जिले में डेंगू का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। बृहस्पतिवार को मिले 13 नए डेंगू मरीजों के बाद संख्या 202 हो गई है। डेंगू के अलावा वायरल, टाइफाइड बुखार के मरीज भी एकाएक बढ़े हैं।
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बुखार कोई भी हो, मरीजों में प्लेटलेट्स कम होने के मामले से परेशानी बढ़ गई है। प्लेटलेट्स की मांग बढ़कर पांच गुना हो गई है। मेडिकल कॉलेज में बी निगेटिव प्लेटलेट्स की कमी बराबर बनी हुई है। वहीं, निजी प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए प्लेटलेट्स की व्यवस्था करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
बृहस्पतिवार को कनावां बाजार अयोध्या से आए रामकेवल प्रजापति ने बताया कि उनके बेटे राघव को प्लेटलेट्स 20 हजार था। दो यूनिट प्लेटलेट्स के लिए वह ब्लड बैंक गए तो पता चला कि बी निगेटिव ग्रुप का प्लेटलेट्स नहीं है। उन्होंने जौनपुर स्थित एक ब्लड बैंक से प्लेटलेट्स की व्यवस्था की, लेकिन उन्हें तीन हजार रुपये चुकाने पड़े। दोस्तपुर से एक निजी अस्पताल में इलाज करा रहे रामनयन कसौंधन को अचानक छह यूनिट प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ी तो वह मेडिकल कॉलेज पहुंचे।
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उन्हें बताया गया कि एक साथ ओ पॉजिटिव ग्रुप का छह यूनिट प्लेटलेट्स नहीं दे सकते। चार तो मिल गया, लेकिन दो के लिए अयोध्या के निजी ब्लड बैंक में तीन हजार रुपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना पड़ा।

एक बार में 16 यूनिट प्लेटलेट्स तैयार करने की क्षमता
मेडिकल कॉलेज में ब्लड सेपरेशन यूनिट में एक बार में 16 यूनिट प्लेटलेट्स तैयार करने की क्षमता है। यहां 600 यूनिट ब्लड सुरक्षित करने की व्यवस्था है। सीएमएस डॉ. सुधीर कुमार गोयल ने बताया कि वायरल और डेंगू मरीजों की तादाद बढ़ने से कभी-कभी मांग 50 से 60 यूनिट की आ जाती है, तब दिक्कत होती है। औसतन 40-45 यूनिट प्लेटलेट्स की मांग रोजाना हो रही है। बी निगेटिव ग्रुप रेयरेस्ट होता है, इसके डोनर भी कम मिलते हैं, इसलिए समस्या आ जाती है।

पैथाेलॉजी में जुट रही भारी भीड़
बुखार का प्रकोप इस कदर बढ़ा है कि अब पैथालॉजी में जांच के लिए लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। औसतन रोजाना करीब 750 मरीजों का रक्त नमूना लिया जा रहा है। स्थिति यह है कि मरीजों को दूसरे दिन के लिए टाला जा रहा है। पांचोपीरन के सलमान ने बताया कि बुधवार को जांच कराने आया था, लेकिन उसे दूसरे दिन जांच के लिए आने को कहा गया। बृहस्पतिवार सुबह 9:00 बजे पहुंचकर लाइन लगाई तो जांच हो सकी।

मरीज बोले, काश! रोज आते प्रधानाचार्य तो सुधर जाती व्यवस्था
बृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव सुबह से ही अस्पताल परिसर में डटे रहे। कार्यालय में बैठकर अस्पताल की व्यवस्था देखी और मरीजों को टरकाने वाले चिकित्सकों को फटकार लगाने के साथ ही कार्रवाई की चेतावनी दी। भीड़ को संभालने वाले पूर्व सैनिक सतर्क रहे।
पूरे दिन कहीं पर जाम नहीं लगा, गाड़ियों को कतारबद्ध खड़ा कराया गया और ओपीडी में स्थिति व्यवस्थित रही। भदैंया के नरायनपुर से आए राम उजागिर ने कहा कि अगर ऐसी व्यवस्था रोज रहती तो मरीजों को कोई परेशानी नहीं होती। बालमपुर से आई रामावती ने कहा कि आज अस्पताल की व्यवस्था काफी बेहतर है। काश! प्रधानाचार्य रोज अस्पताल में आते और ऐसी व्यवस्था रोजाना बनी रहती।
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