सुल्तानपुर। गोमती नदी में जलीय जीवन पर संकट के संकेत दिखाई देने लगे हैं। मंगलवार सुबह सीताकुंड धाम पर टहलने और श्रमदान के लिए पहुंचे लोगों ने नदी किनारे बड़ी संख्या में मृत मछलियां देखीं। देखते ही देखते यह सूचना पूरे क्षेत्र में फैल गई और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई।
शहर के सीताकुंड घाट, सेमर घाट और हयातनगर सहित करीब 15 किलोमीटर के दायरे में बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की पुष्टि हुई है। गोमती मित्रों ने आरोप लगाया कि नदी में कहीं से केमिकल युक्त पानी छोड़े जाने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इस मामले की सूचना मत्स्य विभाग की ओर से क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रायबरेली को दी गई।
क्षेत्रीय अधिकारी अजय कुशवाहा के निर्देश पर वासुदेव जांच टीम के साथ मौके पर पहुंचे और नमूने एकत्र किए। प्रारंभिक जांच में नदी के पानी में ऑक्सीजन की कमी की आशंका जताई गई है, जांच रिपोर्ट आने के बाद खुलासा हो सकेगा।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य पालक विकास अभिकरण रमाकांत पांडेय ने बताया कि गर्मी के मौसम में गोमती नदी का जलस्तर घटने और बहाव कम होने से कई स्थानों पर पानी ठहर जाता है। पानी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जो मछलियों की मौत का प्रमुख कारण बनती है। जांच रिपोर्ट आने के बाद सही जानकारी का पता चलेगा।
गो रक्षा वाहिनी ने जताई चिंता
सुल्तानपुर। सीताकुंड धाम स्थित गोमती नदी में बड़ी संख्या में मछलियों के मृत मिलने पर गो रक्षा वाहिनी ने गहरी चिंता व्यक्त की है।
प्रदेश प्रभारी सर्वेश कुमार सिंह ने प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मत्स्य विभाग से जल की जांच कर मछलियों की मौत के कारणों का पता लगाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। कहाकि जलीय जीवों की सुरक्षा, नियमित जल परीक्षण और प्रदूषण रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की भी अपील की है। (संवाद)