लंभुआ/अलीगंज (सुल्तानपुर)। मांग के सापेक्ष कम आपूर्ति की वजह से डीएपी का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। किसानों को महीनों चक्कर लगाने के बाद एक बोरी डीएपी मिल रही है, जबकि उन्हें आठ बोरी डीएपी की आवश्यकता है। ऐसे में किसानों को डीएपी की जरूरत नहीं पूरी हो पा रही है।
शनिवार को लंभुआ के नरहरपुर स्थित गोदाम पर डीएपी लेने के लिए इक्का-दुक्का किसान दिखाई दिए। कुड़वार के साधन सहकारी समिति बबुरी में डीएपी की सूचना पर किसानों की भीड़ उमड़ पड़ी। जरूरत के मुताबिक किसानों को डीएपी नहीं मिल सकी। कई किसानों को लौटना पड़ा।
लंभुआ बाजार में सहकारी संघ की गोदाम में शनिवार दोपहर 12 बजे सन्नाटा पसरा था। गोदाम प्रभारी क्षितिज सिंह मौजूद मिले। बताया कि सिर्फ एक बार 260 बोरी डीएपी इस सीजन में आई थी, जिसे वितरित कर दिया गया है। उधर, नरहरपुर स्थित बी-पैक्स के गोदाम में करीब 20 दिन इंतजार के बाद शुक्रवार को 280 बोरी डीएपी आई थी। इसके पहले इस गोदाम में 260 बोरी व 200 बोरी डीएपी का वितरण हो चुका है।
डीएपी का वितरण शनिवार को सुबह से ही शुरू हुआ है। इक्का-दुक्का किसान ही डीएपी लेने पहुंच रहे हैं। दोपहर साढ़े 12 बजे के करीब गोदाम पर पांच-छह किसान ही डीएपी लेने पहुंचे थे।
कुड़वार कस्बे के बबुरी न्याय पंचायत के अंतर्गत बहुउद्देशीय ग्रामीण सहकारी समिति अलीगंज में शनिवार को डीएपी खाद वितरण की सूचना मिलते ही किसानों की भीड़ उमड़ पड़ी। सचिव सुबह 10 बजे के बजे के बाद समिति पर पहुंचे और किसानों से आधार जमा कराने के लिए अंगूठा लगाने की प्रक्रिया शुरू कराई। आसपास के कई किसान ऐसे थे, जिन्हें दो से आठ बोरी डीएपी की आवश्यकता थी। उन्हें भी सिर्फ एक बोरी डीएपी से संतोष करना पड़ा।
किसान वासुदेव दुबे ने बताया कि केवल एक बोरी खाद मिल रही है, आठ बोरी की आवश्यकता है। समिति के सचिव मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि 200 बोरी डीएपी खाद आई है, जिसका किसानों में एक-बोरी का वितरण किया गया। अभी चर दिन पहले मिक्सचर खाद 200 बोरी आई थी। अब खाद आने पर ही किसानों को दी जाएगी।
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खाद के लिए पांच बार चक्कर लगा चुका हूं
साधन सहकारी समिति बबुरी में खाद लेने आए उत्तर गांव के किसान सुनील कुमार साहू ने बताया कि दो बोरी की आवश्यकता थी। खाद के लिए पांच बार चक्कर लगा चुका हूं। आज सुबह आठ बजे लाइन लगाने के बाद एक ही बोरी खाद मिल पाई है। बहमरपुर से आए किसान मोहर्रम अली ने कहा कि एक बोरी खाद मिली है। इसके लिए कई दिनों से चक्कर लगा रहे थे। भोज तिवारी का पुरवा निवासी किसान संत प्रकाश तिवारी ने कहा कि एक सप्ताह से खाद के लिए भटक रहा हूं। जरूरत 10 बोरी खाद की है लेकिन एक बोरी खाद मिल रही है। मिठनेपुर निवासी किसान जयकरण यादव कहते हैं कि खाद की किल्लत से बोआई पिछड़ रही है।
समितियों पर भेजी जा रही खाद
जिला कृषि अधिकारी सदानंद चौधरी ने बताया कि जिले में खाद की किल्लत नहीं है। डीएपी, एनपीके, एनपीएस व मिक्सचर खाद भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। समितियों पर मांग के अनुसार ही खाद भेजी जा रही है। खाद के लिए किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।