सुल्तानपुर। शहर से सटे नेकराही स्थित सूफी संत वारिस अली शाह की दरगाह पर उर्स के दूसरे दिन सोमवार रात आस्था और इंसानियत का अनूठा संगम देखने को मिला। जिले के साथ दूसरे प्रदेशों से पहुंचे विभिन्न धर्मों के जायरीन ने शिरकत की। ईद-मिलादुन्नबी और मौलाए काएनात की महफिल के साथ जश्ने वारिस पाक रातभर चला।
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बिहार के समस्तीपुर निवासी चंदन कुमार, जो अब पुणे में रहते हैं, 2011 से उर्स में आ रहे हैं। जायस, गांधीनगर और रायबरेली से पहुंचे कामता प्रसाद पाल 15-16 साल से दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं। बिहार के विक्रमगंज निवासी भोला श्रीवास्तव ने 2018 से जुड़ाव बताया। डॉ. जुबैर खान ने कहा कि यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई बिना भेदभाव गले मिलते हैं। लंगर में दाल, रोटी और चावल परोसे गए।