कुड़वार नाका क्रॉसिंग बंद होने के बाद से शहर के पश्चिमी छोर के पांच मोहल्लों की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। कूड़े नहीं हटने से जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। वैकल्पिक मार्ग पर चार पहिया वाहनों का आवागमन नहीं होने से घरों से निकलने वाला कचरा अब मोहल्ले के बाहर नहीं जा पा रहा है। दिनों-दिन समस्या बढ़ती जा रही है। गंदगी के चलते संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। गंदगी के बीच करीब 20 हजार आबादी जीवन बसर को मजबूर है।
शहर के कुड़वार नाका क्रॉसिंग पर 33 बी फ्लाईओवर के निर्माण कार्य के चलते मुख्य मार्ग को बंद कर दिया गया है। मुख्य मार्ग बंद होने के बाद सेतु निगम व रेलवे विभाग की ओर से पश्चिमी छोर के निवासियों को आवागमन के लिए लखनऊ नाका क्रॉसिंग को वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया है। इस मार्ग से सिर्फ दो पहिया वाहन और पैदल ही लोग आवागमन कर सकते हैं। 19 अक्तूबर को रास्ता बंद होने के बाद चार पहिया वाहनों के आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है। ऐसे में कुड़वार नाका क्रॉसिंग से सटे इलाकों में नगर पालिका की ओर से सफाई के कूड़ा एकत्र करने वाले वाहनों का आवागमन बंद हो गया है।
इसके चलते इन वार्डों की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। निरालानगर, करौंदिया, विवेकनगर, आदर्शनगर, पुलिस लाइन में कूड़ा निस्तारण का प्रबंधन चौपट हो गया है। तकरीबन 20 हजार से अधिक की आबादी गंदगी की समस्या से दो चार हो रही है। जगह-जगह गंदगी के ढेर लग रहे हैं। रास्ता बंद होने के पहले मोहल्लों से निकलने वाले कूड़े को सफाई वाहनों के जरिए हटवा दिया जाता था। अब कूड़ा हटवाने का संकट उत्पन्न हो गया है। कूड़े का जमावड़ा होने से संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि सेतु निगम व रेलवे विभाग की ओर से रास्ता बंद कर दिया गया, लेकिन स्थानीय जनता को होने वाली समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया। इस वजह से तमाम तरह की परेशानियां खड़ी हो रही हैं।