अमेठी। मल्टी सेक्टोरल डवलपमेंट प्रोग्राम के तहत दो वर्ष पूर्व बाजार शुकुल ब्लॉक के सत्थिन गांव में स्वीकृत राजकीय आईटीआई की स्थापना पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
शासन की ओर से स्थापना की स्वीकृति मिलने के बाद नामित कार्यदायी संस्था ने राजस्व विभाग की ओर से आवंटित भूमि को अनुपयोगी बताते हुए दूसरी जमीन आवंटित किए जाने की मांग की है। जमीन जल्द आवंटित नहीं हुई तो भवन निर्माण के लिए आवंटित धनराशि शासन को सरेंडर करनी होगी।
अल्पसंख्यक बाहुल्य ब्लॉकों के सर्वांगीण विकास के लिए केंद्र सरक
ार की ओर से संचालित मल्टी सेक्टोरल डवलपमेंट प्रोग्राम (अब योजना का नाम प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम) के तहत कई वर्ष पूर्व जिले के चार ब्लॉकों बाजार शुकुल, जगदीशपुर, सिंहपुर व बहादुरपुर का चयन किया गया था।
ब्लॉकों का चयन होने के बाद 21 अक्तूबर 2017 को बाजार शुकुल ब्लॉक के सत्थिन गांव में आठ करोड़ दो लाख 51 हजार रुपये की लागत से राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना को स्वीकृति मिली थी।
स्वीकृति के बाद 44.59 लाख रुपये की पहली किस्त अवमुक्त कर उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड सुल्तानपुर को कार्यदायी संस्था नामित किया गया था।
आईटीआई की स्वीकृति व भवन निर्माण की पहली किस्त मिलने के बाद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने जिला प्रशासन से सत्थिन गांव में निशुल्क भूमि आवंटित करने की मांग की थी।
लंबे समय तक चली कवायद के बाद प्रशासन ने आईटीआई के लिए जमीन आवंटित भी की। हालांकि आवंटित जमीन पर काम करने पहुंची संस्था ने भूमि को अनुपयोगी बताते हुए हाथ खड़े कर दिए।
संस्था का कहना है कि यदि उसे जल्द ही दूसरी उपयोगी भूमि नहीं उपलब्ध कराई जाती तो वह प्रथम किस्त के रूप में आवंटित धनराशि सरेंडर करने को विवश होगी।