अमेठी के जिस नर्सिंग होम में सोमवार को ऑपरेशन के बाद प्रसूता की मौत हो गई उसका लाइसेंस तो अप्रैल में ही खत्म हो गया था। मजे की बात ये भी कि ये नर्सिंग होम एक क्लीनिक के लाइसेंस पर संचालित था जबकि नर्सिंग होम के लिए अलग से लाइसेंस लिया जाता है।
तीन साल पहले इसी अस्पताल में एक और गर्भवती की ऑपरेशन के दौरान मौत हो चुकी है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे साफ है कि ये नर्सिंग होम स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण मेंचल रहा था।
पीड़ित परिवार से एक ओर तो धन भी ऐंठा गया और लापरवाही भी जमकर बरती गई। नतीजा मंजू की मौत के रूप में सामने आया। हालांकि नवजात स्वस्थ है। प्रसूता की मौत के बाद अस्पताल कर्मी शव को बाहर कर उसे घर ले जाने का दबाव बनाने लगे।
सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और हंगामा शुरू कर दिया। इसी बीच ग्रामीणों को बवाल करते देख अस्पताल में मौजूद स्टाफ फरार हो गया, जबकि विद्याभूषण को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। बवाल की सूचना मिलते ही एडीएम अशोक कनौजिया, सीओ जीडी मिश्र ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को शांत कराया। अस्पताल में भर्ती तीन अन्य मरीजों को सीएचसी में शिफ्ट कराया गया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है।