देवी-देवताओं को लेकर टिप्पणी के मामले में एडीजे कोर्ट के निर्देश के बाद भी अदालत में हाजिर नहीं होने पर मंगलवार को एसीजेएम पंचम कीर्ति कुणाल ने बसपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट के आदेश से बसपा नेता पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। अदालत से गिरफ्तारी वारंट जारी होने का आदेश होने से बसपा नेता की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
बसपा के राष्ट्रीय महासचिव व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने 21 सितंबर 2014 को लखनऊ में सीतापुर रोड पर स्थित ताड़ीखाना में कर्पूरी ठाकुर भागीदारी महासम्मेलन को संबोधित किया था। बसपा नेता ने अपने संबोधन में हिंदू देवी-देवताओं को लेकर टिप्पणी की थी। हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ दिए गए बयान से क्षुब्ध होकर अधिवक्ता अनिल तिवारी ने बसपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ 26 सितंबर 2014 को कोर्ट में परिवाद दायर किया था। 20 नवंबर 2014 को तत्कालीन एसीजेएम पंचम सरोज कुमार यादव ने बसपा नेता को विचारण के लिए कोर्ट में तलब किया था।
अदालत में हाजिर नहीं होने पर 18 दिसंबर 2014 को कोर्ट ने बसपा नेता के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को बसपा नेता ने जिला जज की कोर्ट में निगरानी याचिका दायर कर चुनौती दी थी। बीते नौ नंवबर को एडीजे सप्तम अजय कुमार दीक्षित ने बसपा नेता की निगरानी याचिका खारिज कर दी थी। एडीजे ने बसपा नेता व परिवादी को एक दिसंबर को मजिस्ट्रेट कोर्ट के समक्ष पेश होने का आदेश दिया था। एडीजे के निर्देश पर भी मंगलवार को बसपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य अदालत में हाजिर नहीं हुए।
कोर्ट में पेश हुए परिवादी अनिल तिवारी ने कहा कि जानकारी के बावजूद बसपा नेता अदालत में हाजिर नहीं हो रहे हैं। एसीजेएम पंचम कीर्ति कुणाल ने बसपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। मामले में अगली सुनवाई के लिए 16 जनवरी 2016 की तिथि नियत की गई है।