किशोरी का अपहरण कर दुष्कर्म करने के मामले मेें फास्ट टैक कोर्ट के न्यायाधीश ने अभियुक्त को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कारावास व 22 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। कोर्ट ने सह अभियुक्त को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
मामला चांदा थाने से जुड़ा है। चांदा थाना क्षेत्र के एक गांव की किशोरी 13 अप्रैल 2011 को खेत गई थी। गांव के ही अभियुक्त अरमान ने चांदा थाने के सलमापुर गांव के सतीश व विजय के साथ मिलकर किशोरी का अपहरण कर लिया था।
आरोप है कि अभियुक्त ने किशोरी के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसे गांव में लाकर छोड़ दिया था। 27 अप्रैल 2011 को पुलिस ने किशोरी के पिता की तहरीर पर अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील गोरखनाथ शुक्ल व अब्दुल मोमिन ने आठ गवाहों को कोर्ट में पेश किया।
फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश जमाल मसूद अब्बासी ने दोनों पक्षों की बहस व साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद शुक्रवार को विजय को सजा सुनाकर जेल भेजने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सह अभियुक्त अरमान को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। जबकि एक अन्य किशोर आरोपी के नाबालिग होने के कारण मामला किशोर न्याय बोर्ड में भेज दिया गया था।