गौरीगंज। बीते 25 अगस्त को स्वास्थ्य विभाग की टीम की ओर से स्कूलों में
दिमागी बुखार का टीका लगाने के बाद बीमार हुए एक बच्चे की इलाज के दौरान
ट्रॉमा सेंटर में मौत हो गई। घटना के चार दिन बाद शुक्रवार को थाने पहुंचे
पीड़ित पिता ने नर्स के खिलाफ टीकाकरण में लापरवाही का आरोप लगाते हुए
हत्या का केस दर्ज किए जाने की मांग की। टीकाकरण के दौरान बच्चे के बीमार
और फिर मौत होने से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा है। पुलिस मामले में
छानबीन करने के बाद केस दर्ज करने की बात कह रही है।
स्थानीय थाने के गांव पूरे गौरन का पुरवा मजरे जेठौना निवासी सुरेश ओझा का
12 वर्षीय पुत्र शिवम गांव के ही उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा छह का
छात्र था। शासन-प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की एक टीम बीते 25
अगस्त को स्कूली बच्चों को दिमागी बुखार का टीका लगाने पहुंची थी। इस दौरान
कई अन्य बच्चों के साथ ही शिवम को भी टीका लगाया गया था। टीका लगने के कुछ
ही देर बाद शिवम की हालत बिगड़ने लगी तो परिवारीजन उसे लेकर संयुक्त जिला
चिकित्सालय गए। संयुक्त जिला चिकित्सालय में तैनात चिकित्सकों ने शिवम की
हालत गंभीर देख उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया था। ट्रॉमा सेंटर में इलाज
के दौरान 30 अगस्त को शिवम की मौत हो गई। घटना के चार दिन बाद शुक्रवार को
थाने पहुंचे पीड़ित पिता ने स्वास्थ्य टीम में शामिल नर्स सुशीला पर
टीकाकरण में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हत्या का केस दर्ज किए जाने की
मांग की।
आरोप लगाया कि नर्स सुशीला ने शिवम के हाथ में सीरिंज लगाकर
इंजेक्शन सहित छोड़ दिया और फोन पर किसी से बात करने लगी। फोन पर चली लंबी
बातचीत के दौरान शिवम के हाथ से खून बहने लगा। बच्चों से इसकी जानकारी
मिलने पर नर्स ने सीरिंज बाहर निकाली। इसी के कुछ देर बाद बच्चे की तबीयत
बिगड़ गई। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के प्रकाश में आने
के बाद जहां प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा है, वहीं पुलिस छानबीन के बाद
केस दर्ज करने की बात कह रही है। गौरतलब होगा कि जिस दौरान स्वास्थ्य टीम
टीकाकरण के लिए विद्यालय पहुंची थी, स्कूल में तैनात प्रधानाध्यापक
रामअंजोर मौके पर मौजूद नहीं थे।
इनसेट
चिकित्सकों की टीम करेगी जांच
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आनंद ओझा ने बताया कि मामला संज्ञान में है।
पीड़ित परिवारीजन उनसे मिले थे। मामले की जांच के लिए तीन चिकित्सकों की एक
टीम गठित की गई है, जो मौके पर जाकर मामले की जांच करेगी। दोष सिद्घ होने
पर स्वास्थ्य टीम में शामिल नर्स व अन्य के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।