गैंगरेप व पॉक्सो के गंभीर आरोपों से घिरे सूबे के परिवहन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के आवास व कार्यालय पर चुनाव के बाद से पसरा सन्नाटा चौथे दिन टूटा। शुक्रवार को न सिर्फ मंत्री का कार्यालय खुला बल्कि कार्यालय प्रभारी की मौजूदगी में समर्थकों ने मतगणना तैयारियों पर चर्चा की।
हालांकि, यह संख्या पहले के दिनों की तरह नहीं थी। जो सीमित लोग मौजूद थे, वे भी आने-जाने वाले पर निगाह रख रहे थे। मंत्री के ठिकाने के संबंध में कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर परिवहन मंत्री समेत सात लोगों के खिलाफ लखनऊ के गौतमपल्ली थाने में गैंगरेप व पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
विधानसभा चुनाव के ठीक पहले दर्ज प्राथमिकी के मामले में उनकी गिरफ्तारी की अटकलें तेज हुईं तो 27 फरवरी को मतदान के तत्काल बाद मंत्री व उनके साथ नामजद अन्य आरोपी अचानक गायब हो गए।
मंत्री के गायब होने व पुलिस की दबिश के डर से उनके कार्यालय व आवास पर सन्नाटा पसर गया। तीन दिनों तक मंत्री के आवास और कार्यालय पर पसरा सन्नाटा चौथे दिन टूटा। शुक्रवार को कार्यालय पर न सिर्फ प्रभारी विजयपाल उपाध्याय मौजूद रहे बल्कि कुछ कार्यकर्ता भी पहुंचे।