भांजी के हत्यारे को उम्रकैद
सुल्तानपुर। छह साल पहले भांजी की गड़ासे से वार कर हत्या करने के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश ने बुधवार को आरोपी मामा दोषी करार देते हुए उम्रकैद व 20 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। मामला अमेठी जिले के गौरीगंज थाने से जुड़ा है।
गौरीगंज थाना क्षेत्र के एक गांव की 16 वर्षीय किशोरी व उसकी बहन गौरीगंज थाने के ग्राम पूरे मर्दान मौजा पड़री गांव में स्थित अपने ननिहाल में घटना से कुछ दिन पूर्व रह रही थीं। 15 मार्च 2012 की रात में किशोरी की धारदार हथियार से वार कर हत्या कर दी गई थी।
पुलिस ने मृतका के नाना द्वारिका प्रसाद मिश्र की तहरीर पर अज्ञात में हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने मृतका के मामा नकुल उर्फ आलोक मिश्र को अभियुक्त बनाया था और उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त गड़ासा कुएं से बरामद किया था।
मामले की विवेचना पूरी कर पुलिस ने अभियुक्त नकुल उर्फ आलोक मिश्र के खिलाफ हत्या व दुष्कर्म के प्रयास के अभियोग में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे सरकारी वकील गोरखनाथ शुक्ल ने घटना को साबित करने के लिए 10 गवाहों को कोर्ट में पेश किया।
बुधवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश अमित कुमार प्रजापति ने अभियुक्त नकुल उर्फ आलोक मिश्र को हत्या के लिए दोषी करार देते हुए सजा सुनाकर जेल भेजने का आदेश दिया। हालांकि कोर्ट ने अभियुक्त को दुष्कर्म के प्रयास के आरोप से बरी कर दिया।
अभियोजन पक्ष की ओर से पेेश किए गए पांच गवाह अदालत में गवाही देने से मुकर गए। घटना की एफआईआर लिखाने वाले मृतका के नाना द्वारिका प्रसाद मिश्र, मामा अतुल मिश्र, प्रधान राजेश पांडेय आला कत्ल गड़ासा बरामदगी के गवाह सोनी पासी व अरविंद पांडेय ने होस्टाइल होकर अभियोजन पक्ष की स्टोरी का समर्थन नहीं किया।
अभियोजन पक्ष के पांच गवाहों के होस्टाइल होने के बाद अदालत ने पुलिस द्वारा बताई गई रेप के प्रयास व हत्या की स्टोरी डगमगाने लगी।
ऐसे में पूरा मामला विवेचक मनोज तिवारी की गवाही पर टिक गया। कोर्ट ने विवेचक की ओर से जुटाए गए साक्ष्य व गवाही को पूर्णतया विश्वसनीय माना और अभियुक्त को सजा सुनाई।