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धोपाप में स्नान करते समय नदीं में डूबने से युवक की मौत

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धोपाप में स्नान करते समय नदी में डूबने से युवक की मौत
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सुल्तानपुर। गंगा दशहरा पर्व पर बुधवार को कोतवाली क्षेत्र के धोपाप घाट पर परिवारीजनों संग गया एक युवक गोमती नदी में नहाते समय डूब गया।

परिवारीजनों ने हादसे की जानकारी मेले में लगे सहायता कैंप में दी लेकिन पुलिस वाले अपनी कुर्सी से हिले तक नहीं। करीब छह घंटे बाद उसका शव नदी से निकाला गया।

मोतिगरपुर कोतवाली क्षेत्र के माधवपुर गांव निवासी जयप्रकाश गुप्ता के दो बेटे सूरज (22) व शिवम बुधवार को धोपाप घाट पर गंगा दशहरा के पर्व पर स्नान करने के लिए आए थे। सूरज के साथ उसके मौसेरे भाई शुभम व सत्यम भी थे।
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इसके अलावा परिवार के अन्य सदस्य भी साथ थे। सुबह करीब आठ बजे सूरज, शिवम, शुभम व सत्यम गोमती नदी के घाट के एकदम किनारे पर पहुंचे। वहां स्नानार्थियों की तादाद काफी कम थी।

भीड़ कम देख चारों युवक गोमती नदी में नहाने के लिए उतर गए। इस दौरान सूरज का संतुलन बिगड़ गया। वह नदी में डूबने लगा। यह देख साथ के युवकों ने बचाव के लिए शोर मचाना शुरू कर दिया।

लोगों के शोर मचाने पर भी कोई मदद के लिए आगे नहीं आया। इस बीच सूरज नदी में डूब गया। इसके बाद सूरज के परिवारीजन भागकर मंदिर के सामने मौजूद पुलिस कैंप में पहुंचे।

कैंप में मौजूद पुलिस कर्मियों ने भी उनकी नहीं सुनी। पुलिस व परिवारीजनों के बीच तीखी बहस हुई। विवाद बढ़ता देख पुलिस को आखिर में झुकना पड़ा। पुलिस ने गांव के गोताखोर बुलाए।

दिन में करीब ढाई बजे गोताखोरों ने नदी से सूरज का शव निकाला। सूरज का शव देखकर परिवारीजन रोने-बिलखने लगे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेजा है।

लंभुआ। गंगा दशहरा पर्व पर पुलिस व प्रशासन की लापरवाही से सूरज की मौत हो गई। बरेली के प्रतिष्ठित संस्थान से बी. फार्मा कर रहा सूरज मेधावी छात्र रहा। इन दिनों वह घर आया हुआ था। पर्व पर परिवार के लोग धोपाप आ रहे थे तो सूरज उन्हीं के साथ यहां आ गया। सूरज की मौत से परिवार के लोगों की खुशियां काफूर हो गई हैं।
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हर साल की तरह इस बार भी धोपाप पर आयोजित होने वाले ऐतिहासिक मेले में पुलिस की अव्यवस्था उजागर हुई। श्रद्धालुओं की सुरक्षा से लेकर भीड़ को नियंत्रण करने में जगह-जगह खामियां उजागर हुईं।

श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि घाट पर निगरानी करने के लिए कोई भी पुलिस कर्मी मौजूद नहीं रहा। यदि समय पर मदद की गई होती तो सूरज बचाया जा सकता था।
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