सुल्तानपुर। जेल में निरुद्ध एक बंदी शनिवार को उपचार कराने के दौरान बंदी रक्षकों को चकमा देकर केजीएमयू, लखनऊ से फरार हो गया। बंदी के फरार होने की सूचना के बाद जिले की पुलिस ने कई स्थानों पर छापा मारा, लेकिन कहीं पता नहीं चला। बंदी के फरार होने के बाद ड्यूटी में लगाए गए दो बंदी रक्षकों के खिलाफ केस दर्जकर उन्हें जेल अधीक्षक ने निलंबित कर दिया है।
कुड़वार थाना क्षेत्र के दुल्लापुर गांव निवासी अंसार (43) पुत्र सना उल्ला को पुलिस ने 10 अगस्त को एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार करके जेल भेजा था। जेल में बंद अंसार को इसी 29 नवंबर को खून की उल्टी होने लगी। अंसार को उल्टी होने पर जेलर अपूर्व व्रत पाठक ने पुलिस प्रशासन से पुलिस गार्ड की मांग की, लेकिन जब पुलिस गार्ड जेल प्रशासन को नहीं दिया गया तो उसकी जान बचाने के लिए बंदी रक्षक अभिषेक कुमार और रामबली निषाद की सुरक्षा में अंसार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जिला अस्पताल में तीन दिसंबर को चिकित्सकों ने अंसार को केजीएमयू, लखनऊ के लिए रेफर कर दिया था। अंसार को लेकर तीन दिसंबर को ही दोनों बंदी रक्षक केजीएमयू पहुंचे थे। शनिवार को चिकित्सक को दिखाने के लिए अंसार पंजीयन काउंटर पर पर्ची बनवा रहा था। इस दौरान वह बंदी रक्षकों को चकमा देकर फरार हो गया। अंसार के फरार होने के बाद दोनों बंदी रक्षकों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन पता नहीं चला। बंदी रक्षकों ने इसकी सूचना जेल अधीक्षक उमेश सिंह को देते हुए केजीएमयू पुलिस चौकी को दी।
केजीएमयू चौकी, लखनऊ की पुलिस के साथ जिले की पुलिस ने अंसार की गिरफ्तारी के लिए कई स्थानों पर छापा मारा, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। जेल अधीक्षक उमेश सिंह ने बताया कि बंदी अंसार को जिला अस्पताल पहुंचाने के लिए जेलर अपूर्व व्रत पाठक ने पुलिस गार्ड की मांग की थी, लेकिन पुलिस गार्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। बंदी की जिंदगी बचाने के लिए दो बंदी रक्षकों की ड्यूटी लगाकर उसे जिला अस्पताल पहुंचाया गया था, जहां चिकित्सक ने केजीएमयू रेफर कर दिया था। बंदी के फरार होने में दोनों बंदी रक्षकों की घोर लापरवाही है। प्रथम दृष्टया दोषी दोनों बंदी रक्षकों रामबली निषाद और अभिषेक कुमार के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराते हुए निलंबित कर दिया गया है।