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सरकारी दफ्तर की कारगुजारी: फाइलों में मर चुके थे रामप्रसाद, चार साल बाद कोर्ट के आदेश से फिर हुए ‘जिंदा’

Fri, 29 May 2026 06:53 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, सुल्तानपुर

सार

सुल्तानपुर में सरकारी दफ्तर की कारगुजारी सामने आई है। फाइलों में मर चुके रामप्रसाद को कोर्ट ने चार साल बाद आदेश देकर फिर से ‘जिंदा’ कर दिया। गवाहों ने पहचान का पूरा खेल खोल दिया। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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कोर्ट ने अपने आदेश में सरकारी कागजों में मृत युवक को जिंदा किया। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी में सुल्तानपुर के बल्दीराय तहसील में सरकारी फाइलों की बड़ी चूक सामने आई है। एक जीवित व्यक्ति राम प्रसाद को राजस्व रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया था। चार साल बाद तहसीलदार की अदालत ने उन्हें फिर से 'जिंदा' करार दिया है।

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यह मामला सरकारी दफ्तरों में फाइलों की मनमानी पर सवाल उठाता है। ग्राम गौहनिया मजरे हलियापुर की कृषि भूमि के उत्तराधिकार को लेकर विवाद था। देव आनंद और राम प्रसाद पक्ष के बीच लंबे समय से कानूनी लड़ाई चल रही थी। अपीलकर्ता देव आनंद ने मृतक की पहचान को लेकर भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया था।

वर्ष 2021 में राजस्व निरीक्षक राम समुझ ने एक गलत आदेश पारित किया। उन्होंने राम प्रसाद और शिवपल्टन को एक ही व्यक्ति मान लिया था। राम प्रसाद सरकारी कागजों में मृत दर्ज हो गए। उनकी जमीन से उनका दावा कमजोर पड़ने लगा।

वरासत विवाद और पहचान की चूक

राजस्व विभाग की फाइलों में चार साल तक यह 'मौत' दर्ज रही। किसी अधिकारी ने मौके की सच्चाई जानने की जरूरत नहीं समझी। ग्रामीणों के बयानों में राम प्रसाद व शिवपल्टन के अलग-अलग व्यक्ति होने की पुष्टि हुई थी। राजस्व निरीक्षक ने दोनों को एक ही मान लिया। इस चूक से राम प्रसाद को अपनी जमीन बचाने में कठिनाई हुई।

सच्चाई की पड़ताल और नया आदेश

यह मामला तहसीलदार अरविंद तिवारी की अदालत पहुंचा। यहां गवाहों, ग्रामीणों, मृत्यु प्रमाण पत्रों और पुराने अभिलेखों की पड़ताल हुई। जांच में साबित हुआ कि मृतक शिवपल्टन था, जबकि राम प्रसाद जीवित हैं। तहसीलदार ने 27 फरवरी 2021 के आदेश को निरस्त कर दिया। उन्होंने राम प्रसाद का नाम खतौनी में फिर से दर्ज करने के निर्देश दिए।

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