सुल्तानपुर। जिले में कोरोना कर्फ्यू का असर फल व सब्जियों के साथ दूध के दामों पर भी पड़ा है। मांग कम होने से दूध का रेट कम हो गया है। होटल, रेस्टोरेंट व चाय की दुकानें बंद होने से दूध की खपत नहीं हो पा रही है। ऐसे में पशुपालकों के सामने मवेशियों के लिए चारे का प्रबंध करना मुश्किल हो गया है।
कोरोना कर्फ्यू के चलते दुग्ध व्यवसाय पूरी तरह प्रभावित हुआ है। दूध की घटती मांग के साथ वाजिब कीमत नहीं मिल पाने से पशुपालकों के सामने पशुओं के चारे और पशु आहार की जहां समस्या खड़ी हुई है, वहीं दूध से खोया, पनीर और घी का निर्माण करने वाले व्यवसायी भी आर्थिक तंगी झेल रहे हैं।
वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दस्तक देने के बाद से देश के सभी व्यवसायों के साथ ग्रामीण अंचल के दुग्ध व्यवसाय को करारी चोट पहुंची है।
गत वर्ष 2020 में लॉकडाउन लगने और इधर वर्ष 2021 में कोरोना की दूसरी लहर के दस्तक देने के बाद लगे कोरोना कर्फ्यू से दुग्ध व्यवसाय को करारा झटका लगा है।
उधर, शहर समेत ग्रामीण अंचल के होटल, रेस्टोरेंट व चाय की दुकानें बंद हो गई हैं। इन दुकानों पर दूध की भारी खपत होती है। ऐसे में दुग्ध व्यवसाय से जुड़े लोगों को काफी नुकसान हो रहा है।
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दूधियों ने बंद कर दिया वितरण
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धनपतगंज। पशुपालन के जरिए दुग्ध व्यवसाय से जुड़े चकिया निवासी गिरिजेश कहते हैं कि भारी कीमत लगाकर अच्छी नस्ल की गाय खरीदी गई थी। दूध की बिक्री से परिवार का भरण-पोषण हो रहा था। कोरोना कर्फ्यू की वजह से दूधियों ने दूध लेना बंद कर दिया है। एक दो समितियां चल भी रही हैं तो उनका रेट इतना गिरा है कि पशुओं के चारे-अनाज की व्यवस्था बना पाना मुश्किल हो गया है।
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होटल बंद होने से नहीं हो रही बिक्री
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धनपतगंज। क्षेत्र के हरौरा गांव निवासी गंगा सागर ने बताया कि काफी पैसा खर्च कर दूध डेयरी का कार्य शुरू किया था। कोरोना कर्फ्यू में होटल बंद होने के बाद दूध की बिक्री का कोई ठौर नहीं बचा है। क्षेत्र में दूध से खोया व पनीर बनाने वाली भट्ठियां ठंडी पड़ी हैं। दूध की डिमांड कम हुई तो इसका सीधा असर पशुपालकों व डेयरी संचालकों पर पड़ा है। इसके चलते ग्रामीण अर्थव्यवस्था को करारा झटका लगा है।
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दाम में कमी के साथ ही आधा हो गया व्यवसाय
भदैंया। इस समय गांव से कस्बे तक दूध का भाव गिर गया है। गांवों में इस समय दूध, दही व मट्ठा की घरों में भरमार है। जिन पशुपालकों के यहां स्वयं को पीने का दूध नहीं बचता था, वहां रोजाना दही से मट्ठा बनाया जा रहा है। शंकरपुर के दूधिया रामकिशुन यादव बताते हैं कि कोरोना कर्फ्यू के पहले रोजाना 400 लीटर दूध शहर ले जाता था। अब यह डेढ़ से दो सौ लीटर हो गया है। केवल घरों के दूध जा रहे हैं। होटल, रेस्टोरेंट व चाय की दुकानों के दूध बंद हैं। टोड़रपुर के रामकुमार यादव ने बताया कि इस समय दूध का दाम बढ़ने के बजाय कम हो गया है। दुकानों पर खपने वाला दूध बंद होने से हम लोग पशुपालकों से नहीं ले रहे हैं। अभियाकलां के दूध व्यवसायी अंकित तिवारी कहते हैं कि पहले हम लोग दूध 50 से 60 रुपये प्रति लीटर बेचते थे। अब यह 40 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। ऊपर से दूध का कारोबार आधा हो गया है। पशुपालकों का भी दबाव हम लोगों पर रहता है।