राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में गंवई मतदाताओं ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है। कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों में बमुश्किल एक चौथाई ही जीत दर्ज करने में कामयाब हो सके। जिले के कुल 36 जिला पंचायत सदस्य वार्ड में कांग्रेस ने 26 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था, जिसमें आठ ही जीत दर्ज कर सके।
सियासी हलके में कांग्रेस के मजबूत दुर्ग के रूप में विख्यात अमेठी में लगातार विपक्षियों की घेराबंदी का असर 2012 के विधानसभा चुनाव से ही दिखने लगा था। चुनाव में राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा की सक्रियता के बावजूद पार्टी केवल जगदीशपुर (सुरक्षित) और तिलोई में विधानसभा क्षेत्र में ही जीत दर्ज कर सकी थी। लोकसभा चुनाव के नतीजे भी कांग्रेस को परेशान करने वाले रहे।
लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी की जीत का अंतर काफी कम हो गया। अमेठी के सियासी परिदृश्य पर नजर डालें तो विधानसभा क्षेत्र स्तर पर समाजवादी पार्टी लगातार अपनी पकड़ मजबूत करती जा रही है तो लोकसभा स्तर पर भाजपा की केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर शिकंजा कस रखा है। लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने जिले के कुल 36 जिला पंचायत सदस्य वार्ड में 26 प्रत्याशियों को उतारा था। कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों में महज आठ ही जीत दर्ज कर सके। पिछले जिला पंचायत चुनाव में कांग्रेस ने बेहतरीन परफार्मेेंस दी थी। कांग्रेस के दम पर ही कमला देवी जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुई थीं।
हालांकि बाद में उन्होंने समाजवादी पार्टी जॉइन कर ली थी। डीडीसी चुनाव में नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्र के मतदाता शामिल नहीं होते। चुनाव पूरी तरह गांव स्तर का होता है। ऐसे में डीडीसी चुनाव के नतीजे गांव-गिरांव में कमजोर हो रही कांग्रेस की पकड़ की चुगली तो कर ही रहे हैं।