विंदेश्वरीगंज (सुल्तानपुर)। हिंदी पखवाड़ा के तहत बल्दीराय के एक निजी संस्थान में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमेें स्थानीय के अलावा दूरदराज से आए कवियों ने काव्य पाठ किया।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ पुष्कर सुल्तानपुरी की सरस्वती वंदना से हुआ। कुशीनगर से आए विकास चौरसिया वैभव ने दूर बैठे हो जरा पास आकर तो देखो, मेरी तकलीफ को हाथों में उठा कर देखो। कविता सुनाकर वाहवाही लूटी। पुष्कर सुल्तानपुरी ने आओ पिला दूं जाम अपनी निगाह से, रोजा नहीं, कोई उपवास नहीं... सुनाकर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
सूरत गुजरात से आए महेश चंद्र मिश्र ने स्वांस-स्वांस के मन का मोती, राम नाम में लय हो, राम नाम के सुमिरन से भय, पाप कष्ट का क्षय हो... पढ़ा तो पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। कर्मराज शर्मा तुकांत ने निष्काम बह रहा हूं दरिया-ए-आब सा, दिखना भी चाहता नहीं कोई नवाब सा... कविता सुनाकर लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा अर्चित यादव और अशोक सिंह ने भी काव्य पाठ किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विजय बहादुर सिंह व मुख्य वक्ता डॉ. अवधेश त्रिपाठी रहे। इस मौके पर रामराज शर्मा, मथुरा प्रसाद यादव, ओमप्रकाश तिवारी, संतोष प्रजापति, आदर्श शर्मा, प्रशांत शर्मा, सुभाष सिंह आदि मौजूद रहे।